जवाबदेही के साथ नवोन्मेष और मजबूती का संतुलन बनाए रखे नीति: आरबीआई डिप्टी गवर्नर जैन

जवाबदेही के साथ नवोन्मेष और मजबूती का संतुलन बनाए रखे नीति: आरबीआई डिप्टी गवर्नर जैन

जवाबदेही के साथ नवोन्मेष और मजबूती का संतुलन बनाए रखे नीति: आरबीआई डिप्टी गवर्नर जैन
Modified Date: September 9, 2026 / 06:50 pm IST
Published Date: September 9, 2026 6:50 pm IST

मुंबई, नौ सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बुधवार को कहा कि नीतियों में नवोन्मेष के लिए पर्याप्त अवसर होना चाहिए, लेकिन इसके साथ जवाबदेही और वित्तीय व्यवस्था की मजबूती भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने यहां वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में कहा कि नीति का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियां तैयार करना होना चाहिए, जिनमें उपयोगी नवोन्मेष जिम्मेदारी के साथ विकसित हो सके।

जैन ने कहा, ‘‘इसके लिए ऐसे स्पष्ट नियम जरूरी हैं, जहां जोखिमों को समझा जा चुका हो, वहीं उभरते जोखिमों के मामले में प्रयोग के लिए पर्याप्त गुंजाइश हो और प्रौद्योगिकी तथा उसके उपयोग में बदलाव के साथ नियमों में भी बदलाव किया जा सके। अच्छी नीति को नवोन्मेष को बढ़ने का अवसर देना चाहिए और साथ ही जवाबदेही तथा मजबूती भी बढ़नी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि नीतियां जमीनी स्तर पर हो रहे बदलावों से भी जुड़ी होनी चाहिए। तेजी से बदलते माहौल में नियामक केवल रिटर्न और निगरानी से जुड़ी जानकारी के आधार पर उभरती प्रौद्योगिकियों को पूरी तरह नहीं समझ सकते।

जैन ने कहा कि वित्तीय संस्थानों, वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों और प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाताओं के साथ नियमित बातचीत से नए उपयोगों और उभरती चिंताओं की जल्द पहचान करने में मदद मिलती है। इससे उद्योग को नियामकीय अपेक्षाओं को समझने में भी स्पष्टता मिलती है।

उन्होंने कहा कि नई प्रौद्योगिकियों को केवल अनुमान के आधार पर समझने के बजाय नियंत्रित तरीके से उनके उपयोग के जरिये बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। इस संबंध में नियामकीय परीक्षण व्यवस्था (सैंड बॉक्स) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि इससे नए अनुप्रयोगों को तय सीमाओं के भीतर परखा जा सकता है और उसके बाद ही उन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।

जैन ने नियमन को लेकर कहा, ‘‘यदि किसी प्रौद्योगिकी को बहुत जल्दी नियंत्रित किया जाता है, तो ऐसी तकनीक के लिए विस्तृत नियम बनाए जाने का जोखिम रहता है जिसे अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है या जिसकी कार्यप्रणाली नियम लागू होने से पहले ही बदल सकती है।’’

उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा आधारित गणनाओं, डिजिटल मंचों, क्लाउड बुनियादी ढांचे और क्वांटम कंप्यूटिंग में तेजी से हो रही प्रगति के बीच नीति निर्माताओं को प्रौद्योगिकी के अंतिम उपयोगकर्ता को नहीं भूलना चाहिए।

उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी के दूसरे छोर पर हमेशा कोई व्यक्ति होता है…कोई बचतकर्ता, जो अपनी मेहनत की कमाई किसी संस्था को सौंपता है, कोई कर्ज लेने वाला, जो अवसर तलाश रहा है, कोई व्यापारी, जो भुगतान का इंतजार कर रहा है या कोई परिवार, जो मुश्किल समय में वित्तीय व्यवस्था पर निर्भर है।”

उन्होंने कहा कि आखिरकार वित्तीय व्यवस्था की जिम्मेदारी इन्हीं लोगों के प्रति है। अधिकांश ग्राहकों को शायद कभी पता न चले कि किसी सिफारिश के पीछे कौन-सा मॉडल था, उसे किस क्लाउड व्यवस्था पर चलाया गया या किसी लेनदेन को संभव बनाने वाली तकनीक कौन-सी थी, लेकिन वे उसके परिणाम का अनुभव जरूर करेंगे।

डिप्टी गवर्नर ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी पर लोगों का भरोसा इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि वह कितनी आधुनिक है, बल्कि इस पर कि वह उनके लिए निष्पक्ष, भरोसेमंद और सुरक्षित तरीके से काम करती है या नहीं।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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