नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में बिजली महंगी होने की आशंका है, क्योंकि बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (एप्टेल) ने सोमवार को दिल्ली के बिजली नियामक डीईआरसी को बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के 38,500 करोड़ रुपया बकाये के परिसमापन की प्रक्रिया तीन सप्ताह में शुरू करने का निर्देश दिया।
न्यायाधिकरण ने दिल्ली विद्युत नियामक प्राधिकरण (डीईआरसी) द्वारा समय बढ़ाने के अनुरोध को नकारते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुरूप तय समयसीमा में परिसमापन प्रक्रिया शुरू की जाए।
इस फैसले से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
डीईआरसी ने कहा कि दिल्ली में कुल नियामकीय परिसंपत्तियां (आरए) 38,552 करोड़ रुपये हैं। आरए वे खर्च होते हैं जो डिस्कॉम ईंधन लागत, मरम्मत आदि में वहन करती हैं और जिन्हें बाद में उपभोक्ताओं से अधिभार के रूप में वसूला जाता है।
एप्टेल ने यह भी कहा कि इस बकाया के परिसमापन में देरी का कोई कानूनी आधार नहीं है और इससे अंततः उपभोक्ताओं पर ही बोझ बढ़ेगा।
न्यायाधिकरण ने डिस्कॉम की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के द्वारा जांच कराने की डीईआरसी की मांग भी खारिज कर दी। इसके बजाय, डीईआरसी को एक सप्ताह के भीतर स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त कर तीन महीने में ऑडिट पूरा करने का निर्देश दिया गया।
डीईआरसी की ओर से दाखिल आंकड़ों के मुताबिक, कुल बकाये में 19,174 करोड़ रुपये बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, 12,333 करोड़ रुपये बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड और 7,046 करोड़ रुपये टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड के हैं।
दिल्ली सरकार की ओर से इस फैसले पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि पहले संकेत दिए गए थे कि इस मुद्दे के समाधान के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी जा सकती है।
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