खुदरा, एमएसएमई क्षेत्र में दबाव से बैंक कर्ज लौटाने में चूक में हो सकती वृद्धि: रिपोर्ट
खुदरा, एमएसएमई क्षेत्र में दबाव से बैंक कर्ज लौटाने में चूक में हो सकती वृद्धि: रिपोर्ट
मुंबई, 18 मार्च (भाषा) खुदरा और छोटे उद्यमों में उभरते दबाव के कारण निकट भविष्य में बैंकों में ऋण के मामले में नई चूक बढ़ने की आशंका है। हालांकि, समग्र परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत बनी हुई है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा और उद्योग मंडल एसोचैम की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इसके बावजूद समग्र परिसंपत्ति गुणवत्ता पर प्रभाव सीमित रहेगा और सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनएनपीए) अनुकूल स्तर पर बनी रहेंगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र के प्रमुख परिसंपत्ति गुणवत्ता मापदंडों में लगातार सुधार हो रहा है और सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति एक दशक के निचले स्तर पर है। यह कर्ज लौटाने में कम चूक और लगातार वसूली के कारण संभव हुआ है। इससे फंसे कर्ज की संख्या में कमी आई है।
ऋण वृद्धि के मोर्चे पर इक्रा को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 25 से 26 लाख करोड़ रुपये यानी 13.7-14.3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए, ऋण विस्तार 23.50 से 25 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
इक्रा का अनुमान है कि कर्ज की मांग मजबूत बनी रहेगी। इस गति में खुदरा और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) की प्रमुख भूमिका बनी रहेगी।
वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत में ऋण की मांग धीमी रही क्योंकि बैंक खुदरा क्षेत्र और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के प्रति सतर्क थे। जबकि कंपनियों ने कम ब्याज दर के कारण बॉन्ड बाजारों को प्राथमिकता दी।
हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के अंत तक ऋण वृद्धि में तेजी आई और यह गति वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भी जारी रही। 22 सितंबर, 2025 को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती के बाद आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता और खुदरा ऋणों की मांग ने इसमें योगदान दिया।
भाषा रमण अजय
अजय

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