अब निजी क्षेत्र के निवेश में भी निरंतर हो रही वृद्धि: आर्थिक मामलों की सचिव

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अब निजी क्षेत्र के निवेश में भी निरंतर हो रही वृद्धि: आर्थिक मामलों की सचिव

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  • Publish Date - August 7, 2026 / 06:35 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 06:35 PM IST

नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि लगातार बढ़ते सार्वजनिक पूंजीगत व्यय से मिले प्रोत्साहन के कारण अब निजी क्षेत्र का निवेश भी निरंतर और टिकाऊ वृद्धि के मार्ग पर है।

ठाकुर ने हाल के एक विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के 2023 सर्वे में जहां निजी निवेश में सुधार के शुरुआती संकेत मिले थे, वहीं अब यह ‘स्थिर और संतुलित गति से ऊपर की ओर बढ़ता’ दिख रहा है।

उन्होंने आर्थिक शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय पांच गुना से अधिक होकर 2025-26 में 10.7 लाख करोड़ रुपये हो गया है जबकि 2014-15 में यह दो लाख करोड़ रुपये था।

चालू वित्त वर्ष के बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को 12.2 लाख करोड़ रुपये रखने का लक्ष्य रखा गया है।

ठाकुर ने कहा, “विभिन्न संकेतकों- जैसे परियोजनाओं के क्रियान्वयन की संख्या और अटकी परियोजनाओं की संख्या से पता चलता है कि अटकी परियोजनाएं एक दशक के निचले स्तर पर हैं, जो कि एक सकारात्मक संकेत है। निजी निवेश को आकर्षित करने में सार्वजनिक निवेश उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है।”

उन्होंने कहा कि भारत की दीर्घकालिक वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि उत्पादक परिसंपत्तियां, वैश्विक प्रतिस्पर्धी उद्योग, गुणवत्तापूर्ण रोजगार और नवाचार के सृजन में सार्वजनिक एवं निजी पूंजी का कितने प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाता है।

आर्थिक मामलों की सचिव ने कहा कि सार्वजनिक नीतियां अनुकूल माहौल बना सकती हैं, लेकिन स्थायी उत्पादकता, वृद्धि और प्रौद्योगिकी प्रगति का वास्तविक आधार निजी क्षेत्र की पहल है। निजी निवेश उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ शोध, नई तकनीकों के उपयोग और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ाव को भी बढ़ावा देता है।

उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए वित्त तक पहुंच बेहतर बनाने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि ये विनिर्माण क्षेत्र की रीढ़ हैं।

ठाकुर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया इस समय असाधारण अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजार की अस्थिरता, व्यापार रुझानों का विखंडन और तकनीकी बदलाव प्रमुख कारक हैं।

उन्होंने कहा, ‘पिछले तीन वर्षों में भारत वृद्धि और स्थिरता का केंद्र बना हुआ है, जहां अर्थव्यवस्था औसतन सात प्रतिशत की दर से बढ़ी है और व्यापक आर्थिक स्थिरता भी बनी रही है। मजबूत घरेलू मांग भारत की बड़ी ताकत है।’

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इसका सकल प्रवाह रिकॉर्ड स्तर पर रहा, लेकिन भारत जैसे देश के लिए यह पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाने के लिए नीतिगत स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

भारतीय कंपनियों के विदेशों में किए जा रहे निवेश (ओडीआई) को उन्होंने सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि यह भारतीय निजी क्षेत्र की परिपक्वता को दर्शाता है।

ठाकुर ने कहा कि देश में घरेलू वित्तीय संसाधनों का दायरा बढ़ा है और घरेलू बचत अब इक्विटी बाजार और म्यूचुअल फंड जैसे विविध माध्यमों में निवेश की ओर अग्रसर है।

उन्होंने नवाचार को दीर्घकालिक वृद्धि का प्रमुख चालक बताते हुए कहा कि अब आर्थिक वृद्धि सिर्फ श्रम एवं पूंजी पर निर्भर नहीं है, बल्कि बढ़ते हुए ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर आधारित हो रही है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण