नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) सरकार ने सोमवार को पहली बार वस्तुओं एवं सेवाओं दोनों के लिए ‘उत्पादक मूल्य सूचकांक’ (पीपीआई) के आंकड़े जारी किए। इससे कीमतों में बदलाव का अधिक सटीक आकलन संभव होगा और अगले पांच वर्षों में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) को चरणबद्ध ढंग से हटाने की राह तैयार होगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि यह कदम उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के व्यवहार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसमें भारत को डब्ल्यूपीआई की जगह पीपीआई को अपनाने की जरूरत पर बल दिया गया था।
मंत्रालय के मुताबिक, आउटपुट और इनपुट दोनों प्रकार के पीपीआई उपलब्ध होने से उद्योगों में उपयोग होने वाले कच्चे माल (इनपुट) और तैयार उत्पाद (आउटपुट) की कीमतों में बदलाव को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
इससे यह भी स्पष्ट होगा कि उत्पादकों पर इनपुट लागत में बढ़ोतरी का अंतिम उत्पाद की कीमतों पर किस तरह असर पड़ता है।
मई, 2026 के लिए अखिल भारतीय आउटपुट पीपीआई (सभी वस्तुएं) 109.6 दर्ज किया गया, जो अप्रैल में 108.6 था। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र के लिए परीक्षण आधार पर जारी इनपुट पीपीआई मई में 104.9 रहा।
मंत्रालय ने बताया कि इनपुट पीपीआई को फिलहाल प्रायोगिक आधार पर जारी किया जा रहा है ताकि आंकड़ों की गुणवत्ता का आकलन किया जा सके और हितधारकों से सुझाव प्राप्त किए जा सकें।
मई में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दर अप्रैल के 8.26 प्रतिशत से बढ़कर 9.68 प्रतिशत हो गई। इसी के अनुरूप आउटपुट पीपीआई मुद्रास्फीति भी अप्रैल के 8.1 प्रतिशत से बढ़कर मई में 9.4 प्रतिशत हो गई है।
सरकार ने डब्ल्यूपीआई और पीपीआई दोनों के लिए आधार वर्ष को संशोधित कर 2022-23 कर दिया है। इसमें कुल 957 वस्तुओं को शामिल किया गया है।
आउटपुट पीपीआई (वस्तुएं) में विनिर्मित उत्पादों का भारांश सबसे अधिक 69.93 प्रतिशत है जबकि कृषि, वानिकी एवं मत्स्य का 22.16 प्रतिशत, बिजली का 4.49 प्रतिशत और खनन का भारांश 3.42 प्रतिशत है।
सेवा क्षेत्र के पीपीआई के पहले चरण में सात सेवाओं- बैंकिंग, प्रतिभूति लेनदेन, बीमा, पेंशन फंड प्रबंधन, रेलवे, हवाई यात्री सेवा एवं दूरसंचार को शामिल किया गया है। चूंकि यह पूरे सेवा क्षेत्र को कवर नहीं करता, इसलिए इनके लिए फिलहाल अलग-अलग भारांश नहीं तय किया गया है।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि शेष सेवाओं को अगले चरण में शामिल किया जाएगा, जिसके लिए जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) और मूल्य सर्वेक्षण के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा।
यह बदलाव नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता वाले कार्य समूह की सिफारिशों के बाद किया गया है। इस समूह का गठन 30 दिसंबर, 2024 को किया गया था।
चंद ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘‘थोक मूल्य सूचकांक के उलट, पीपीआई उत्पादकों के दृष्टिकोण से कीमतों में बदलाव को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है और इस तरह यह राष्ट्रीय आय/ सकल घरेलू उत्पाद के आकलन में अधिक उपयोगी है।’’
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प्रेम अजय
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