‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ पर रोक का प्रस्ताव छोटे उद्यमों के वित्तपोषण को कर सकता प्रभावित: उद्योग संगठन

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‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ पर रोक का प्रस्ताव छोटे उद्यमों के वित्तपोषण को कर सकता प्रभावित: उद्योग संगठन

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 06:56 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 06:56 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) छोटे एवं मझोले उद्यमों के शीर्ष निकाय एफआईएसएमई ने मंगलवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को ‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ यानी फिर से उपयोग वाली ऋण सुविधा देने से रोकने का प्रस्ताव छोटे उद्यमों के लिए कार्यशील पूंजी के वित्तपोषण को प्रभावित कर सकता है। संगठन ने केंद्रीय बैंक से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

‘फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज’ (एफआईएसएमई) ने इस महीने की शुरुआत में जारी ‘भारतीय रिजर्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां–ऋण सुविधाएं) संशोधन निर्देश, 2026 के मसौदे’ पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि एनबीएफसी द्वारा ‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ पर पूरी तरह रोक लगाने से एमएसएमई के कार्यशील पूंजी प्रबंधन में बाधा आ सकती है।

‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ ऐसी ऋण सुविधा होती है जिसमें ग्राहक या कारोबारी को एक तय ऋण सीमा दी जाती है। वह इस सीमा के भीतर जरूरत के अनुसार पैसा निकाल सकता है, चुकाने के बाद वही सीमा फिर से उपलब्ध हो जाती है।

आरबीआई ने अपने मसौदे में प्रस्ताव दिया है कि ‘‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) केवल ऐसी ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी जो निश्चित अवधि के कर्ज के रूप में होंगी और किसी भी तरह से ‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ सुविधा उपलब्ध नहीं कराएंगी।’’

केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से 28 अगस्त, 2026 तक सुझाव मांगे हैं।

उद्योग संगठन ने कहा कि एनबीएफसी उन उद्यमों और क्षेत्रों को ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिन्हें बैंकों से पर्याप्त वित्त नहीं मिल पाता। संगठन ने चेतावनी दी कि यह कदम भले ही अपारदर्शी ऋण व्यवस्था, कर्ज के लगातार नवीनीकरण और गलत तरीके से ऋण जारी रखने पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया हो, लेकिन इससे एमएसएमई के वैध कार्यशील पूंजी वित्त पर अनजाने में असर पड़ सकता है।

संगठन के महासचिव अनिल भारद्वाज ने कहा कि आरबीआई की अनिश्चित अवधि तक ऋण बढ़ाते रहने, कर्ज लेने वालों पर छिपे दबाव और नुकसानदायक ऐप आधारित ऋण देने संबंधी चिंताएं उचित हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, किसी उत्पादक उद्यम के लिए कार्यशील पूंजी की जरूरत उपभोक्ता ‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ से अलग होती है। नियमन का लक्ष्य किसी उत्पाद से जुड़े जोखिम और व्यवहार को नियंत्रित करना होना चाहिए, न कि केवल पुन: उपयोग की सुविधा की प्रकृति के कारण एक वैध वित्तीय साधन को खत्म कर देना।’’

एफआईएसएमई ने आरबीआई से पारदर्शी, जिम्मेदार और उचित ऋण व्यवस्था के उद्देश्य को बनाए रखते हुए एनबीएफसी की ‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ सुविधाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

संगठन ने कहा कि अंतिम निर्देशों में उपभोक्ता सुविधा वाले ऋण और उत्पादक कार्यशील पूंजी वित्त के बीच अंतर किया जाना चाहिए। साथ ही, ऋण मूल्यांकन, निगरानी, जानकारी साझा करने और आंकड़ा प्रबंधन संबंधी नियमों के जरिये जोखिमों को नियंत्रित किया जाना चाहिए तथा उन बाजार क्षेत्रों के वित्तपोषण में एनबीएफसी की भूमिका बनी रहनी चाहिए, जिन्हें बैंक पर्याप्त सेवा नहीं दे पाते।

गेटफाइव फंड्स के प्रबंध निदेशक श्रीकांत गोयल ने कहा कि आमतौर पर सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के पास नकदी कम होती है और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर भुगतान प्राप्त करने की होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘कोई एमएसएमई विनिर्माता आज अपना उत्पाद बेच सकता है, लेकिन उसे भुगतान कई सप्ताह बाद मिल सकता है। इस दौरान उसे कर्मचारियों का वेतन, कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान और अन्य खर्च पूरे करने होते हैं। ऐसे में ‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ मददगार होता है। इसलिए रिवॉल्विंग क्रेडिट पर रोक से अल्पावधि में एमएसएमई कंपनियों की नकदी और धन प्रवाह प्रभावित हो सकता है।’’

भाषा रमण अजय

अजय