नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी ने ऑडिट फर्म बीएसआर एंड एसोसिएट्स एलएलपी और उसके पूर्व साझेदार एन संपत गणेश की अपील खारिज कर दी है। दोनों ने आईएलएंडएफएस सिक्योरिटीज सर्विसेज लिमिटेड (आईएसएसएल) से जुड़े मामले में संपत्ति कुर्क करने और अनुचित ढंग से अर्जित संपत्ति वापस लेने की कार्यवाही के लिए ‘गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय’ (एसएफआईओ) के अधिकार को चुनौती दी थी।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) की तीन-सदस्यीय पीठ ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 17 मार्च, 2026 के आदेश को बरकरार रखा है। एनसीएलटी ने एसएफआईओ के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
अपीलकर्ताओं ने दलील दी थी कि एसएफआईओ एक ही मामले में आपराधिक कार्यवाही का जांचकर्ता और उसी जांच रिपोर्ट के आधार पर दीवानी कार्यवाही में याचिकाकर्ता नहीं हो सकता। इससे उसके पास दीवानी और आपराधिक दोनों तरह की देनदारी तय करने की भूमिका आ जाएगी।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस दलील को ‘पूरी तरह आधारहीन’ बताते हुए कहा कि संबंधित दीवानी कार्यवाही में याचिकाकर्ता एसएफआईओ नहीं, बल्कि केंद्र सरकार है। एसएफआईओ को केवल केंद्र सरकार की ओर से एनसीएलटी के समक्ष कार्यवाही दाखिल करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत किया गया था।
पीठ ने कहा कि याचिका ‘भारत संघ’ के नाम से दाखिल की गई थी, न कि एसएफआईओ के नाम से। कार्यवाही शुरू करने का फैसला केंद्र सरकार का था और एसएफआईओ के निदेशक को केवल याचिका पेश करने तथा उसकी कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत किया गया था।
मामला केंद्र सरकार के 30 सितंबर, 2018 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें आईएलएंडएफएस और उसकी सहायक कंपनियों, जिनमें आईएसएसएल भी शामिल थी, के मामलों की एसएफआईओ से जांच कराने का निर्देश दिया गया था।
एसएफआईओ ने 14 जुलाई, 2023 को आईएसएसएल के मामलों पर अपनी जांच रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी। इसके बाद कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने 26 सितंबर, 2023 को एसएफआईओ के निदेशक को रिपोर्ट एनसीएलटी के समक्ष रखने तथा कंपनी अधिनियम के तहत संपत्ति कुर्क करने और अनुचित तरीके से हासिल संपत्ति वापस लेने की कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत किया।
आईएसएसएल के पूर्व वैधानिक ऑडिटर बीएसआर एंड एसोसिएट्स और गणेश ने कहा था कि यह पत्र केवल एक कार्यकारी आदेश है और केंद्र सरकार की शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए औपचारिक राजपत्र अधिसूचना के जरिये अधिकार सौंपना जरूरी था।
एनसीएलएटी ने इस दलील को भी खारिज करते हुए कहा कि संबंधित पत्र को सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी थी। पीठ ने कहा कि दीवानी या आपराधिक देनदारी को एसएफआईओ नहीं तय करता है, बल्कि उसका निर्धारण संबंधित न्यायाधिकरण या अदालत करती है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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