भविष्य की महत्वपूर्ण खनिज जरूरतों को पूरा करने के लिए खनन व अन्वेषण पर जोर दें: रिपोर्ट

भविष्य की महत्वपूर्ण खनिज जरूरतों को पूरा करने के लिए खनन व अन्वेषण पर जोर दें: रिपोर्ट

भविष्य की महत्वपूर्ण खनिज जरूरतों को पूरा करने के लिए खनन व अन्वेषण पर जोर दें: रिपोर्ट
Modified Date: February 10, 2026 / 05:55 pm IST
Published Date: February 10, 2026 5:55 pm IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) नीति आयोग ने देश की भविष्य की महत्वपूर्ण खनिज आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर अन्वेषण एवं खनन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।

एक रिपोर्ट में नीति आयोग ने मिशन-आधारित ‘क्रिटिकल रॉ मटीरियल’ अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) ढांचा स्थापित कर घरेलू नवाचार एवं प्रौद्योगिकी क्षमता विकसित करने का सुझाव दिया है।

आयोग ने मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में ऊर्जा बदलाव के लिए प्राथमिक खनिजों के शुरुआती चरण के अन्वेषण के लिए शर्तों के साथ ‘‘पहले आओ, पहले पाओ’’ (एफसीएफएस) पहुंच की व्यवस्था शुरू करने का सुझाव दिया है जिसमें डेटा खुलासा और अधिकार आधारित प्रगति शामिल हो।

नीति आयोग ने खनिजों को उनकी आपूर्ति भू-राजनीतिक जोखिम के आधार पर वर्गीकृत कर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने तथा आयात जोखिम कम करने की भी सिफारिश की है।

इस 133 पृष्ठ की रिपोर्ट में आयोग ने उच्च मूल्य वाले ‘स्क्रैप’ (कबाड़) के नियंत्रित आयात की अनुमति देकर, खदान के अवशेषों व पुराने कचरे तक अधिकृत पहुंच को सक्षम बनाकर और अवशेषों की क्षमता का राष्ट्रीय मूल्यांकन करके ऊर्जा बदलाव के लिए आवश्यक खनिजों के लिए भरोसेमंद द्वितीयक कच्चा माल तलाशने पर भी जोर दिया है।

रिपोर्ट में राष्ट्रीय ‘क्रिटिकल रॉ मटीरियल’ (सीआरएम) विश्लेषण रणनीति इकाई की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि नीति एवं बाजार साधनों के बेहतर समन्वय में सुधार किया जा सके।

नीति आयोग ने कहा कि भारत की महत्वपूर्ण खनिज चुनौती तेजी से बढ़ती मांग, उच्च आयात निर्भरता, केंद्रीत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, लंबी विकास समयसीमा और पर्यावरण व सामाजिक प्रदर्शन को लेकर बढ़ती अपेक्षाओं के संयोजन से परिभाषित होती है। हालांकि, कई पहल इस चुनौती के कुछ हिस्सों का समाधान करती हैं लेकिन आपूर्ति सुरक्षा अंततः इस बात पर निर्भर करेगी कि मांग में वृद्धि, घरेलू क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार और शासन समय के साथ कितनी अच्छी तरह से समन्वित होते हैं।

विश्लेषण में यह भी देखा गया कि घरेलू संसाधनों एवं भंडारों के जरिये इस मांग को कैसे पूरा किया जा सकता है। साथ ही आयात जोखिम, भू-राजनीतिक खतरे और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) सहित नीतिगत साधनों को भी ध्यान में रखा गया है।

नीति आयोग ने कहा कि जहां घरेलू संसाधन मौजूद हैं (जैसे तांबा व ग्रेफाइट) वहां भी अन्वेषण, खदान संचालन, परिशोधन और पुनर्चक्रण में बाधाएं मूल्य श्रृंखला के विकास को धीमा कर रही हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी भी व्यावसायिक जोखिम एवं अनुमति संबंधी अड़चनों के कारण सीमित बनी हुई है।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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