(RBI New Rules 1st July/ Image Credit: ANI News)
नई दिल्ली: RBI New Rules 1st July: भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने रुपये की स्थिरता और सही वैल्यू सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब विदेशी बाजारों में होने वाले रुपये से जुड़े डेरिवेटिव सौंदों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। यह कदम रुपये की ग्लोबल ट्रेडिंग को मजबूत बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से उठाया गया है।
नए नियमों के तहत विदेशों में होने वाले रुपये आधारित डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर अब RBI की सीधी नजर रहेगी। खासकर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) जैसे विदेशी बाजारों में होने वाले सौदे भी ट्रैक किए जाएंगे। अब तक निगरानी सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित थी। लेकिन अब विदेशी लेन-देन भी दायरे में आ जाएंगे।
RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्रुप और विदेशी सहयोगी कंपनियों के सभी महत्वपूर्ण ऑफशोर ट्रांजैक्शन की जानकारी दें। इसमें कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू, मैच्योरिटी, काउंटरपार्टी और करेंसी स्ट्रक्चर जैसी डिटेल शामिल होंगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि रुपये पर दबाव कहां से बन रहा है और जोखिम कैसे बदल रहा है।
यह नया सिस्टम जुलाई 2027 से शुरू होगा और धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। शुरुआत में कुछ ट्रांजैक्शन ही कवर होंगे। लेकिन जनवरी 2028 तक अधिक डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। जुलाई 2028 तक लगभग पूरा विदेशी डेरिवेटिव डेटा RBI के पास रिपोर्ट करना जरूरी होगा। जिससे पूरा सिस्टम पारदर्शी बनेगा।
RBI का मानना है कि इस कदम से फॉरेक्स मार्केट में पारदर्शिता बढ़ेगी और रुपये की वास्तविक कीमत बेहतर तरीके से तय हो सकेगी। साथ ही यह नीति जोखिम को समझने और उसे नियंत्रित करने में भी काफी मदद करेगी। छोटे लेन-देन और बैक-टू-बैक सौदों को रिपोर्टिंग से छूट दी गई है ताकि बैंकिंग प्रक्रिया पर ज्यादा बोझ न पड़े।