बाहरी झटकों से निपटने के लिए आरबीआई को नीतिगत दर 0.25 प्रतिशत बढ़ानी चाहिए: एसबीआई रिसर्च

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बाहरी झटकों से निपटने के लिए आरबीआई को नीतिगत दर 0.25 प्रतिशत बढ़ानी चाहिए: एसबीआई रिसर्च

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 10:07 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 10:07 PM IST

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक को लगातार जारी बाहरी झटकों, कच्चे तेल की ऊंची कीमत और व्यापक मुद्रास्फीति दबाव के संकेतों से निपटने के लिए अगले महीने नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि और फिर दिसंबर में इतनी ही वृद्धि करनी चाहिए। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में शुक्रवार को यह कहा गया।

आरबीआई की ब्याज दर तय करने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक 5-7 अक्टूबर, 2026 को होनी है।

केंद्रीय बैंक ने अगस्त में लगातार चौथी बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था।

रिपोर्ट में कहा गया, ”सिर्फ एक महीने पहले ब्याज दर में बढ़ोतरी की व्यावहारिक रूप से अधिक चर्चा नहीं थी, और अधिकांश को ‘लंबे ठहराव’ की उम्मीद थी। लेकिन तब से स्थिति में भारी बदलाव आया है।”

बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग द्वारा तैयार ‘एसबीआई इकोरैप’ में कहा गया है कि ब्याज दर में बढ़ोतरी की उसकी अपील अमेरिकी फेडरल रिजर्व के किसी भी आगामी कदम से प्रभावित नहीं है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच हाल ही में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है।

रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अगले 15 दिनों में कच्चे तेल की कीमत 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया, ”हम विभिन्न उभरते जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि और उसके तुरंत बाद दिसंबर में एक और वृद्धि की वकालत करते हैं।”

इसमें कहा गया कि यदि तेल की कीमत उच्च स्तर पर बनी रहती है, तो अक्टूबर और नवंबर के मुद्रास्फीति आंकड़े 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकते हैं।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण

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