आरबीआई की मानक निर्गम रणनीति से एसडीएल बाजार में पारदर्शिता, नकदी बढ़ेगी: विशेषज्ञ

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आरबीआई की मानक निर्गम रणनीति से एसडीएल बाजार में पारदर्शिता, नकदी बढ़ेगी: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - April 3, 2026 / 06:26 PM IST,
    Updated On - April 3, 2026 / 06:26 PM IST

मुंबई, तीन अप्रैल (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की चुनिंदा राज्यों के लिए ‘मानक निर्गम रणनीति’ (बीआईएस) से राज्य विकास ऋण (एसडीएल) बाजार में पारदर्शिता और नकदी में सुधार होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों के बॉन्ड की निरंतर भारी आपूर्ति के बीच उधार लेने की लागत और प्रतिफल अंतर पर इसका प्रभाव धीरे-धीरे पड़ने की संभावना है।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 से इस रणनीति को पायलट आधार पर शुरू करने का फैसला किया है, जिसके तहत राज्य पूर्व-घोषित उधारी योजना के आधार पर विशिष्ट समय अवधि में प्रतिभूतियां जारी करेंगे।

इस ढांचे का मकसद बड़े और अधिक नकदी वाले मानक बॉन्ड बनाना, मूल्य निर्धारण में सुधार करना और निवेशकों को राज्य बॉन्ड बाजार में आपूर्ति के बारे में बेहतर स्पष्टता देना है।

बाजार प्रतिभागियों ने कहा कि यह रणनीति राज्य उधारी कार्यक्रमों में अधिक अनुशासन और पूर्वानुमेयता लाकर जारीकर्ताओं और निवेशकों दोनों को फायदा पहुंचाएगी।

एरेट कैपिटल के उपाध्यक्ष माताप्रसाद पांडेय ने कहा कि मानक निर्गम रणनीति से बाजार में पारदर्शिता और नकदी बढ़ेगी। साथ ही राज्यों को अपने ऋण को अधिक कुशलता से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।

रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और प्रबंध साझेदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा कि पांच वर्ष, 10 वर्ष और 15 वर्ष जैसी प्रमुख परिपक्वता अवधि वाले निर्गम को मानकीकृत करने से विश्वसनीय मानक प्रतिभूतियां बनाने में मदद मिलेगी।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम