रीगल रिसोर्सेज ने बिहार में 389 करोड़ रुपये के विस्तार से मक्का प्रसंस्करण क्षमता दोगुनी की

रीगल रिसोर्सेज ने बिहार में 389 करोड़ रुपये के विस्तार से मक्का प्रसंस्करण क्षमता दोगुनी की

रीगल रिसोर्सेज ने बिहार में 389 करोड़ रुपये के विस्तार से मक्का प्रसंस्करण क्षमता दोगुनी की
Modified Date: May 26, 2026 / 07:09 pm IST
Published Date: May 26, 2026 7:09 pm IST

(लक्ष्मी देवी एरे द्वारा)

पटना, 26 मई (भाषा) कृषि-प्रसंस्करण कंपनी रीगल रिसोर्सेज ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी मक्का पिसाई (क्रशिंग) की क्षमता दोगुनी कर दी है और बिहार के किशनगंज में अपने समेकित प्रसंस्करण परिसर में 389 करोड़ के निवेश के साथ नई डेरिवेटिव विनिर्माण इकाइयां शुरू की हैं।

कोलकाता स्थित इस कंपनी ने बताया कि उसने अपनी वेट मिलिंग यूनिट में पिसाई क्षमता 825 टन प्रतिदिन (टीपीडी) से बढ़ाकर 1,650 टन प्रतिदिन (टीपीडी) कर दी है। साथ ही, उसने 180 टन प्रतिदिन की क्षमता वाली एक नई तरल ग्लूकोज विनिर्माण इकाई और 50 टन प्रतिदिन उत्पादन करने में सक्षम एक माल्टोडेक्सट्रिन पाउडर यूनिट भी शुरू की है।

कंपनी ने अपने निजी सह-उत्पादन बिजली संयंत्र की क्षमता भी 7.1 मेगावाट से बढ़ाकर 15.8 मेगावाट कर दी है।

रीगल ने बताया कि इस विस्तार से लगभग 475 अतिरिक्त प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, जिससे उसके कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर लगभग 950 हो जाएगी। इसके अलावा लॉजिस्टिक, भंडारगृह, परिवहन और खरीद जैसे क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अनिल किशोरपुरिया ने पत्रकारों से कहा, ‘‘1,650 टन प्रतिदिन की क्षमता के साथ, रीगल अब पूर्वी भारत में मक्का की सबसे बड़ी वेट मिलिंग यूनिट का संचालन करेगी।’’

लिक्विड ग्लूकोज का उपयोग कन्फेक्शनरी, बिस्किट, आइसक्रीम, जैम और शराब बनाने में किया जाता है, जबकि माल्टोडेक्सट्रिन पाउडर का उपयोग खाद्य और पेय पदार्थों, फार्मास्यूटिकल्स, डेयरी उत्पादों और न्यूट्रास्यूटिकल्स में होता है।

रीगल ने बताया कि किशनगंज स्थित उसकी इकाई को बिहार के प्रमुख मक्का व्यापार केंद्रों—गुलाबबाग और डालखोला मंडी—के करीब होने का लाभ मिलता है। इससे कच्चे माल की खरीद और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता बनाए रखने में मदद मिलती है।

कंपनी ने बताया कि बिहार सरकार की ‘औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति’ (बीआईआईपीपी) से मिला सहयोग इस विस्तार में एक महत्वपूर्ण कारक साबित हुआ है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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