परियोजना समयसीमा चूकने पर क्षतिपूर्ति देकर ग्रिड पहुंच सुविधा बनाए रख सकेंगी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां
परियोजना समयसीमा चूकने पर क्षतिपूर्ति देकर ग्रिड पहुंच सुविधा बनाए रख सकेंगी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) परियोजना क्रियान्वयन में देरी का सामना कर रही नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां क्षतिपूर्ति देकर अधिक समय तक बिजली पारेषण ग्रिड के लिए मिली पहुंच सुविधा को बनाए रख सकेंगी। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के हाल के आदेश में यह कहा गया है।
सीईआरसी ने इसके लिए चरणबद्ध क्षतिपूर्ति व्यवस्था लागू की है। इससे पहले की व्यवस्था में तय समय के भीतर विभिन्न चरणों के लक्ष्य पूरे नहीं करने पर संबंधित नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों को दी गई ग्रिड कनेक्टिविटी या पारेषण सुविधा रद्द कर दी जाती थी।
नए आदेश के तहत अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली से जुड़ने और सामान्य नेटवर्क पहुंच संबंधी नियम, 2022 के तहत लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय को लेकर क्षतिपूर्ति देनी होगी।
सीईआरसी ने कहा कि कई इकाइयां नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को लागू करने और ग्रिड कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए अतिरिक्त समय मांग रही हैं। आयोग ने ऐसे कई मामलों में क्षतिपूर्ति लेकर अतिरिक्त समय दिया है।
आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों से एक समान तरीके से निपटने की तत्काल जरूरत थी। इन मामलों में इकाइयों ने परियोजना को लागू करने की दिशा में प्रगति की है और सामान्य नेटवर्क पहुंच नियमों के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मांग रही हैं।
नियामक ने कहा कि इन संस्थाओं ने सीमित उपलब्ध संसाधन यानी ग्रिड कनेक्टिविटी को अपने पास बनाए रखा है। इसलिए देरी के कारण चाहे जो भी हो, उन्हें चरणबद्ध तरीके से क्षतिपूर्ति देने पर अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि लक्ष्य जल्द से जल्द पूरे किए जा सकें।
नई व्यवस्था में ग्रिड कनेक्टिविटी से जुड़े प्रमुख लक्ष्यों में आवश्यक भूमि के 50 प्रतिशत हिस्से से संबंधित दस्तावेज जमा करना, वित्त की व्यवस्था पूरी करना और परियोजना शुरू करना शामिल है।
जमीन से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगने वाली नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी के पास आवश्यक भूमि के कम से कम 20 प्रतिशत हिस्से के दस्तावेज होने चाहिए। उसे मूल समय सीमा समाप्त होने से कम-से-कम 15 कार्य दिवस पहले आवेदन करना होगा।
इसी तरह, वित्त की व्यवस्था पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर कंपनी के पास उस क्षमता के लिए आवश्यक भूमि के कम से कम 20 प्रतिशत हिस्से के दस्तावेज होने चाहिए, जिसके लिए सैद्धांतिक या अंतिम ग्रिड कनेक्टिविटी मंजूर किए जाने की सूचना दी गई है। इसके लिए भी मूल समय सीमा खत्म होने से कम से कम 15 कार्य दिवस पहले आवेदन करना होगा।
सीईआरसी के आदेश के अनुसार, भूमि बैंक गारंटी व्यवस्था के तहत आने वाली इकाइयों को आवश्यक भूमि के 75 प्रतिशत हिस्से के दस्तावेज देने होंगे।
आदेश के अनुसार, वहीं, आशय पत्र या बिजली खरीद समझौते के माध्यम से आने वाली इकाई को आवश्यक भूमि के 50 प्रतिशत हिस्से के दस्तावेज देने होंगे।
मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि सीईआरसी की नई चरणबद्ध क्षतिपूर्ति व्यवस्था भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक पहल है। पहले की ‘लक्ष्य पूरा करो या कनेक्टिविटी खो दो’ व्यवस्था की जगह अब क्षतिपूर्ति देकर समय बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इससे परियोजनाओं के लिए जोखिम एक स्पष्ट लागत में बदल जाता है और आगे बढ़ चुकी परियोजनाएं सीमित पारेषण कनेक्टिविटी को बनाए रख सकती हैं।
भाषा रमण अजय
अजय

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