ईंधन दक्षता मानदंडों के मसौदे की समीक्षा जारी, कार्यान्वयन समयसीमा पर चर्चा की जाएगी: सियाम

Ads

ईंधन दक्षता मानदंडों के मसौदे की समीक्षा जारी, कार्यान्वयन समयसीमा पर चर्चा की जाएगी: सियाम

  •  
  • Publish Date - April 14, 2026 / 06:17 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 06:17 PM IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) वाहन बनाने वाली कंपनियों के शीर्ष निकाय सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (सियाम) ने मंगलवार को कहा कि वह ईंधन दक्षता मानक कैफे तीन के नए मसौदे की समीक्षा कर रहा है और कार्यान्वयन की समयसीमा पर अंतिम राय बनाने के लिए सभी विनिर्माताओं की तैयारी पर अपने सदस्यों के साथ बातचीत करेगा।

सियाम के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (कैफे-तीन) मानकों के नए मसौदे में छोटी कारों के लिए प्रस्तावित प्रोत्साहनों के बारे में पूछे जाने पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) चंद्रा ने कहा, ‘‘सियाम ने छोटी कारों पर कभी टिप्पणी नहीं की क्योंकि यह एक ऐसा विषय था जिस पर अलग-अलग राय थी।’’

नियमों को लेकर वाहन विनिर्माताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं। छोटी कार विनिर्माता कंपनियों का तर्क है कि वजन और किफायत के आधार पर कैफे-तीन मानकों में उन्हें रियायत दी जानी चाहिए, जबकि बड़े मूल उपकरण विनिर्माता इस भेदभावपूर्ण व्यवहार का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सुरक्षा सुविधाओं से समझौता होगा।

मारुति सुजुकी और टोयोटा किर्लोस्कर जैसी कंपनियां छोटी कारों को लाभ देने की मांग कर रही हैं, वहीं टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंदै और किआ जैसी अन्य कंपनियां इसके खिलाफ हैं।

छोटी कारों को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को लेकर वाहन उद्योग में मतभेदों को दूर करने का प्रयास करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘एक संशोधित मसौदा आया है, जिसकी हम अगले एक-दो दिन में समीक्षा करेंगे। हम ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के साथ बैठक करने जा रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि यह बैठक समयसीमा के संबंध में रचनात्मक रहेगी।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या उद्योग एक अप्रैल, 2027 तक कैफे तीन मानदंडों को लागू करने की स्थिति में होगा, जबकि अभी तक मानदंडों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, चंद्रा ने कहा, ‘‘अभी हम समयसीमा और सभी मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘फिर हम अगले एक-दो दिन में बीईई के साथ होने वाली बैठक में अपनी बात रखेंगे और इस पर निर्णय लेंगे। इसलिए उससे पहले, मसौदे में क्या है या हम क्या रुख अपनाने जा रहे हैं, इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।’’

उल्लेखनीय है कि भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने सोमवार को कहा था कि अगले वर्ष एक अप्रैल से वाहन विनिर्माताओं को ईंधन दक्षता के कड़े मानदंडों का पालन करना होगा। इसका कारण कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (कैफे तीन) मानकों के कार्यान्वयन की समय सीमा बढ़ाये जाने की संभावना नहीं है।

दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के बारे में पूछे जाने पर चंद्रा ने अधिक अनुकूल परिवेश बनाने और अनिवार्यताओं को कम करने का समर्थन किया।

दिल्ली की ईवी नीति में केवल इलेक्ट्रिक तिपहिया और दोपहिया वाहनों को अनिवार्य करने और जनवरी, 2027 से नए सीएनजी तिपहिया वाहनों और अप्रैल, 2028 से नए पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है,

उन्होंने कहा, ‘‘सियाम का मानना ​​है कि हमें इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए अनुकूल परिवेश बनाना चाहिए।’’

इस बारे में विस्तार से बताते हुए चंद्रा ने कहा, ‘‘अनुकूल परिवेश से मेरा तात्पर्य शून्य कार्बन उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। यह प्रोत्साहनों के माध्यम से संभव है। इसके साथ चार्जिंग बुनियादी ढांचे की चुनौतियों को दूर करना है, ताकि उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हों…।’’

भाषा रमण अजय

अजय