पश्चिम एशिया संघर्ष : भारत का सोया खली निर्यात 63 प्रतिशत घटकर 60,000 टन पर सिमटा

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पश्चिम एशिया संघर्ष : भारत का सोया खली निर्यात 63 प्रतिशत घटकर 60,000 टन पर सिमटा

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  • Publish Date - April 14, 2026 / 08:56 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 08:56 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 14 अप्रैल (भाषा) महंगी कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के असर से भारत का सोया खली निर्यात मार्च में करीब 63 प्रतिशत घटकर महज 60,000 टन रह गया। प्रसंस्करणकर्ताओं के एक संगठन ने मंगलवार को यह अनुमान जताया।

संगठन के अनुमान के मुताबिक, मार्च, 2025 में देश से 1.62 लाख टन सोया खली का निर्यात किया गया था।

भारतीय सोयाबीन प्रसंस्करणकर्ता संघ (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया,‘‘भारतीय सोया खली के दाम अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में लंबे वक्त से अधिक बने हुए हैं।’’

पाठक ने बताया, ‘पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण ईरान के साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत और ओमान जैसे देशों में भारतीय सोया खली निर्यात की आपूर्ति बाधित हुई है। इससे निर्यात पर दबाव बढ़ा है।”

वैसे मार्च में सोया खली की घरेलू खपत मजबूत रही। सोपा के अनुमान के मुताबिक, पिछले महीने देश में पशु आहार के रूप में इसका उपयोग बढ़कर छह लाख टन पर पहुंच गया। यह मार्च, 2025 में पांच लाख टन के स्तर पर था।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि निर्यात में कमजोरी के बावजूद घरेलू पशु आहार उद्योग सोया खली की मांग को सहारा दे रहा है।

पश्चिम एशिया का संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ था। इस संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार ठप हो गया और आयात-निर्यात बाधित हुआ।

प्रसंस्करण कारखानों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाला उत्पाद ‘सोया खली’ कहलाता है। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के साथ ही पशु आहार तथा मुर्गियों व मछलियों का दाना भी तैयार किया जाता है।

भाषा हर्ष जोहेब अजय

अजय