नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने देश में रसोई गैस (एलपीजी) की ढुलाई के लिए पाइपलाइन अवसंरचना विकसित करने के लिए बड़े स्तर पर पहल शुरू की है ताकि सड़क मार्ग पर निर्भरता को कम और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
तेल एवं गैस नियामक ने कहा कि इस पहल के तहत रिफाइनरियों और आयात टर्मिनलों को बॉटलिंग संयंत्रों से पाइपलाइन के जरिए जोड़ा जाएगा, जिससे थोक भंडारण टैंकरों से होने वाले परिवहन की जगह अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और दक्ष प्रणाली विकसित की जा सके।
पीएनजीआरबी ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए नौ पाइपलाइन परियोजनाओं की पहचान की गई है और फिलहाल करीब 2,500 किलोमीटर लंबाई वाली चार प्रमुख परियोजनाओं… चेरलापल्ली-नागपुर, शिकरापुर-हुबली-गोवा, पारादीप-रायपुर और झांसी-सितारगंज के लिए निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इन परियोजनाओं में लगभग 12,500 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है और ये एलपीजी की आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
नियामक के मुताबिक, इससे एलपीजी आपूर्ति शृंखला अधिक सुव्यवस्थित होगी, परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान में कमी आएगी और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटेगा।
पीएनजीआरबी ने कहा कि वर्ष 2030 तक एलपीजी के बड़े पैमाने पर सड़क मार्ग से परिवहन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का लक्ष्य है, जिससे दुर्घटना जोखिम कम होगा और आपूर्ति शृंखला की मजबूती बढ़ेगी।
नियामक ने कहा, “एलपीजी का घरेलू और वाणिज्यिक उपयोग में महत्व काफी अधिक है। बंदरगाहों और रिफाइनरियों को बॉटलिंग संयंत्रों से कुशलता से जोड़ना जरूरी है। हालांकि पाइपलाइन परिवहन का बेहतर माध्यम है लेकिन अभी बड़ी मात्रा में एलपीजी का परिवहन टैंकरों के जरिए होता है।”
पीएनजीआरबी ने कहा कि यह पहल देश के ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे एलपीजी परिवहन अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनेगा।
इसके साथ ही, यह निवेश, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।
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प्रेम रमण
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