नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों के लिए ‘रिलीफ’ योजना के तहत पात्र गंतव्यों की सूची को बढ़ाया है।
सरकार ने संघर्ष के कारण उत्पन्न बाधाओं का सामना कर रहे निर्यातकों की सहायता के लिए 19 मार्च को 497 करोड़ रुपये की रिलीफ (निर्यात सुगमीकरण के लिए लचीलापन और लॉजिस्टिक हस्तक्षेप) योजना शुरू की थी।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ”इस विस्तार के साथ, रिलीफ रूपरेखा के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत वितरण या पारेषण के लिए भेजी जाने वाली खेपों हेतु पात्र देशों की सूची में मिस्र और जॉर्डन को जोड़ा गया है।”
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 16 मार्च, 2026 को या उसके बाद नई ‘ईसीजीसी होल टर्नओवर पॉलिसी’ लेने वाले निर्यातक सहायता के लिए पात्र होंगे।
ईसीजीसी होल टर्नओवर पॉलिसी (डब्ल्यूटीपी) एक व्यापक क्रेडिट बीमा पॉलिसी है जो किसी कंपनी द्वारा 12 महीने की अवधि में विदेशी खरीदारों को किए गए सभी निर्यात शिपमेंट को कवर करती है और भुगतान न होने के जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करती है।
इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य अधिक स्पष्टता सुनिश्चित करना और निर्यातकों, विशेष रूप से नए पॉलिसीधारकों की व्यापक भागीदारी को आसान बनाना है।
इसमें कहा गया, ”पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति और खाड़ी तथा आसपास के क्षेत्रों में समुद्री लॉजिस्टिक पर इसके लगातार प्रभाव को देखते हुए, सरकार ने निर्यात संवर्धन मिशन के तहत एक समयबद्ध हस्तक्षेप ‘रिलीफ’ के अंतर्गत पात्र गंतव्यों की सूची को बढ़ाया है।”
एक अलग बयान में मंत्रालय ने कहा कि उसने विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के तहत मानक समितियों के कामकाज को मजबूत करने के लिए लक्षित सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है।
इन उपायों का मकसद काम पूरा होने की समयसीमा में सुधार करना, शीघ्र मंजूरी देना और अग्रिम अधिकार योजना के तहत पारदर्शिता को बढ़ाना है।
भाषा पाण्डेय रमण
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