अरुणाचल प्रदेश में कमला और कलाई-2 जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 40,000 करोड़ रुपये मंजूर

अरुणाचल प्रदेश में कमला और कलाई-2 जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 40,000 करोड़ रुपये मंजूर

अरुणाचल प्रदेश में कमला और कलाई-2 जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 40,000 करोड़ रुपये मंजूर
Modified Date: April 8, 2026 / 06:43 pm IST
Published Date: April 8, 2026 6:43 pm IST

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अरुणाचल प्रदेश में दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए कुल 40,150 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के विकास और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए यह कदम उठा रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने कमला जलविद्युत परियोजना (1,720 मेगावाट) के लिए 26,069.50 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी।

यह परियोजना सार्वजनिक क्षेत्र की एनएचपीसी लिमिटेड और राज्य सरकार के संयुक्त उद्यम के जरिये कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में बनाई जाएगी। इसके निर्माण की अनुमानित अवधि आठ वर्ष है।

यह संयंत्र सालाना लगभग 687 करोड़ यूनिट बिजली पैदा करेगा, जिससे चरम मांग को प्रबंधित करने, राष्ट्रीय ग्रिड को संतुलित करने और ब्रह्मपुत्र घाटी में बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने अंजाव जिले में लोहित नदी पर स्थित कलाई-2 जलविद्युत परियोजना (1,200 मेगावाट) के लिए 14,105.83 करोड़ रुपये मंजूर किए। इसे टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा बनाया जाएगा। इस परियोजना को 78 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। चालू होने के बाद इससे सालाना लगभग 485 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, केंद्र सरकार इन बिजली परियोजनाओं के लिए सड़कों, पुलों और पारेषण लाइनों जैसे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बजटीय सहायता देगी।

दोनों परियोजनाओं से संबंधित राज्यों को 12 प्रतिशत बिजली मुफ्त मिलेगी, जबकि एक प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सा स्थानीय क्षेत्र विकास कोष (एलएडीएफ) के लिए निर्धारित किया गया है।

ये मंजूरियां अरुणाचल प्रदेश में चल रही अन्य जलविद्युत परियोजनाओं, जैसे सुबनसिरी निचली (2,000 मेगावाट), दिबांग बहुउद्देश्यीय (2,880 मेगावाट) और इटालिन (3,097 मेगावाट) की पूरक हैं। इनके जरिये पूर्वोत्तर राज्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम


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