मुंबई, दो मार्च (भाषा) अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की धारणा प्रबल होने से सोमवार को रुपया 42 पैसे की भारी गिरावट के साथ 91.50 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इन सैन्य हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और अमेरिकी मुद्रा की मांग में तीव्र वृद्धि हुई है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली और विदेशी कोषों की निकासी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव को और बढ़ा दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.23 पर खुला और कारोबार के दौरान इसने 91.65 का निचला स्तर छुआ। अंत में रुपया पिछले बंद भाव के मुकाबले 42 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 91.50 (अस्थायी) पर बंद हुआ।
शुक्रवार को रुपया 17 पैसे टूटकर 91.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि सप्ताहांत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में उपजी अनिश्चितता के कारण रुपये में लगभग आधा प्रतिशत की गिरावट आई।
उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में रातों-रात हुई वृद्धि ने रुपये पर दबाव डाला।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 91.46/47 के स्तर पर ‘हस्तक्षेप’ ने रुपये को 91.50 के स्तर पर सुरक्षा प्रदान की।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.67 प्रतिशत बढ़कर 98.22 पर रहा।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 8.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत के आयात बिल में भारी वृद्धि का जोखिम उत्पन्न हो गया है, क्योंकि देश अपनी ईंधन आवश्यकताओं का 85 प्रतिशत आयात के माध्यम से पूर्ण करता है।
घरेलू शेयर बाजार में, सेंसेक्स 1,048.34 अंक या 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,238.85 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 312.95 अंक या 1.24 प्रतिशत टूटकर 24,865.70 अंक पर रहा।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 7,536.36 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।
भाषा सुमित अजय
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