मुंबई, 30 सितंबर (भाषा) अमेरिकी डॉलर सूचकांक में आई गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते रुपया बुधवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे मजबूत होकर 95.81 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में कई दशक के उच्च स्तर से आई गिरावट ने भी रुपये को समर्थन दिया। हालांकि, कमजोर घरेलू बाजारों ने भारतीय मुद्रा की तेज बढ़त को सीमित किया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.87 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान यह कमजोर होकर 95.98 के निचले स्तर तक आया। कारोबार के अंत में रुपया 95.81 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 13 पैसे की बढ़त है।
रुपया मंगलवार को मामूली बढ़त के साथ 95.94 पर बंद हुआ था, जो 96 प्रति डॉलर के स्तर के करीब था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की धारणा के कारण रुपये पर नकारात्मक दबाव रह सकता है।’’
उन्होंने कहा कि मध्यस्थों के जरिये अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत की उम्मीद रुपये को निचले स्तर पर समर्थन दे सकती है।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.14 प्रतिशत गिरकर 101.23 पर रहा।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 0.58 प्रतिशत बढ़कर 103.18 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो 10 दिन से अधिक समय का इसका सबसे निचला स्तर है।
कारोबारियों के अनुसार, रुपया सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सरकारी बैंकों द्वारा हाजिर और वायदा बाजारों में डॉलर की बिक्री किए जाने से रुपये का हाजिर भाव 96 के स्तर से नीचे बना हुआ है।
इसके अलावा, इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की करीब 2.2 अरब डॉलर की निकासी और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में मजबूती से भी रुपये पर दबाव बना हुआ है।
घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 48.78 अंक गिरकर 72,480.29 अंक और निफ्टी 95.75 अंक की गिरावट के साथ 22,620.45 अंक पर बंद हुआ।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को शुद्ध रूप से 9,980.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
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यासिर अजय
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