सरकार दूसरी छमाही में जुटाएगी 7.86 लाख करोड़ रुपये, कुल उधारी अनुमान 1.2 लाख करोड़ रुपये घटाया

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सरकार दूसरी छमाही में जुटाएगी 7.86 लाख करोड़ रुपये, कुल उधारी अनुमान 1.2 लाख करोड़ रुपये घटाया

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 08:35 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 08:35 PM IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में प्रतिभूतियों के जरिये 7.86 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। इसके साथ ही सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की कुल सकल बाजार उधारी का अनुमान 1,20,494 करोड़ रुपये घटा दिया है।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रतिभूतियों के जरिये होने वाली सकल बाजार उधारी का अनुमान घटाकर 15,99,506 करोड़ रुपये कर दिया है। बजट में इसके 17,20,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया था।

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ विचार-विमर्श के बाद वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 7,86,000 करोड़ रुपये की बाजार उधारी लेने का फैसला किया है। इसमें 15,000 करोड़ रुपये के सरकारी हरित बॉण्ड भी शामिल हैं।

मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली छमाही में सितंबर के अंत तक सरकार 8,13,506 करोड़ रुपये की उधारी लेगी, जबकि इसके लिए 8.20 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुल बाजार उधारी में कमी मुख्य रूप से 2026-27 में परिपक्व होने वाली 1,14,286 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की स्विचिंग के कारण है। यह सरकार की ऋण प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है।

मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए शुद्ध बाजार उधारी बजट के स्तर पर ही रखी गई है। सूत्रों ने कहा कि शुरुआती राजकोषीय दबाव के बावजूद सरकार बजट में तय राजकोषीय अनुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, लंबी अवधि की प्रतिभूतियों पर जोर देने से सरकार की भारित औसत परिपक्वता (डब्ल्यूएएम) बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो पहली छमाही में घट गई थी। लंबी परिपक्वता अवधि से पुरानी देनदारियों को नई उधारी से चुकाने के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार स्विचिंग और बायबैक जैसे उपायों के जरिये अपने कर्ज का प्रबंधन कर रही है और बाजार पर अतिरिक्त दबाव नहीं डाल रही है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को पेश बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 17.20 लाख करोड़ रुपये की सकल बाजार उधारी का अनुमान जताया था। राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 16.9 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। बजट में शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था।

मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये की सकल बाजार उधारी 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये पूरी की जाएगी। यह उधारी तीन, पांच, सात, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की परिपक्वता वाली प्रतिभूतियों के जरिये जुटाई जाएगी।

उधारी में 10 साल की प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 26.3 प्रतिशत होगी। इसके बाद 15 साल की 17.6 प्रतिशत, पांच साल की 12.1 प्रतिशत और 50 साल की 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। तीन, सात, 30 और 40 साल की प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी क्रमशः 6.9, 9.1, 9.2 और 8.9 प्रतिशत होगी।

वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सरकार ट्रेजरी बिल के जरिये प्रति सप्ताह 23,000 करोड़ रुपये की उधारी लेगी। इसके लिए 13 नीलामी सप्ताह तय किए गए हैं। इसमें 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन के ट्रेजरी बिल के तहत क्रमशः 8,000 करोड़, 8,000 करोड़ और 7,000 करोड़ रुपये की उधारी होगी।

आरबीआई ने दूसरी छमाही के लिए सरकार की अस्थायी नकदी जरूरतों को पूरा करने के मकसद से अर्थोपाय अग्रिम (डब्ल्यूएमए) की सीमा 50,000 करोड़ रुपये तय की है।

मंत्रालय ने कहा कि सरकार आरबीआई के साथ विचार-विमर्श कर बाजार की परिस्थितियों और अन्य जरूरतों के आधार पर उधारी कैलेंडर में बदलाव कर सकती है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण