(दिल्ली अर्थ26 के शीर्षक एवं खबर में सुधार के साथ)
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ माना गया था।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एनएसई की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और सीआईसी सहित अन्य पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
एनएसई ने दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक जुलाई के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी हुई है।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अप्रैल, 2010 के एकल न्यायाधीश के उस फैसले के खिलाफ एनएसई की अपील खारिज कर दी थी, जिसमें एनएसई को आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एच) के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ माना गया था।
स्टॉक एक्सचेंज ने जून, 2007 के सीआईसी के आदेश को एकल न्यायाधीश के समक्ष चुनौती देते हुए दावा किया था कि वह आरटीआई कानून के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं है।
आरटीआई अधिनियम के तहत नागरिक केवल ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ से ही सूचना मांग सकते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि यदि कोई संस्था सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है अथवा पर्याप्त वित्तीय सहायता पाती है, तो उसे ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ माना जाएगा।
खंडपीठ ने कहा था, “एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में माना है कि एनएसई पर सरकार का नियंत्रण है और हम इससे सहमत हैं।”
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