गैर-बैंकों को धनप्रेषण साझेदारी के लिए आरबीआई की पूर्व-मंजूरी की जरूरत खत्म

Ads

गैर-बैंकों को धनप्रेषण साझेदारी के लिए आरबीआई की पूर्व-मंजूरी की जरूरत खत्म

  •  
  • Publish Date - May 13, 2026 / 09:48 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 09:48 PM IST

मुंबई, 13 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को गैर-बैंकिंग संस्थाओं को भारत में बैंकों के माध्यम से विदेश धन भेजने की सेवाएं देने के लिए गठजोड़ करने पर पूर्व-अनुमति की अनिवार्यता खत्म कर दी।

केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में एक परिचालन ढांचा जारी किया है, जिसके तहत गैर-बैंकिंग संस्थाएं अधिकृत डीलर श्रेणी-1 बैंकों के माध्यम से ऐसी सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।

आरबीआई ने कहा, “समीक्षा के बाद यह तय किया गया है कि ऐसी साझेदारी के लिए आरबीआई की मंजूरी की प्रक्रिया समाप्त की जाए। इसके बजाय अधिकृत डीलर बैंकों को निर्देशों का पालन करना होगा, जब वे गैर-व्यापार चालू खाता लेनदेन के लिए तीसरे पक्ष के जरिये ऑनलाइन माध्यम से सीमापार धनप्रेषण की सुविधा देंगे।”

धनप्रेषण के ऑनलाइन माध्यम में वेबसाइट, ऑनलाइन मंच, सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन और मोबाइल ऐप शामिल हैं।

आरबीआई के 2016 के दिशानिर्देशों के मुताबिक, गैर-बैंकिंग संस्थाओं को ऐसी सेवाओं के लिए अधिकृत डीलर श्रेणी-1 बैंकों के साथ गठजोड़ करने के लिए आरबीआई से विशेष अनुमति लेनी होती थी।

संशोधित ढांचे के तहत अब अधिकृत डीलर बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होंगे कि सभी लेनदेन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के अनुरूप हों और ‘अपने ग्राहक को जानें’ (केवाईसी) नियमों का पालन किया जाए।

इसके अलावा, तीसरे पक्ष के मंच के जरिये धन भेजने वाले ग्राहकों को कुछ जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाना अनिवार्य होगा। इसमें विदेशी मुद्रा विनिमय दर, उस दर का समय और वैधता अवधि, लेनदेन की कुल अनुमानित लागत, प्राप्तकर्ता के खाते में जमा होने वाली सटीक राशि और अधिकतम समय शामिल है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय