नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने रियल एस्टेट कंपनी ओमेक्स और पांच अन्य को न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी संबंधी नियमों को पूरा करने के लिए कृत्रिम तरीके से सार्वजनिक शेयरधारिता दिखाने के मामले में प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित किया है। नियामक ने इन पर कुल 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सेबी के आदेश के अनुसार, ओमेक्स पर तीन महीने के लिए प्रतिभूति बाजार में प्रवेश पर रोक लगाई गई है, जबकि उसके प्रवर्तक रोहतास गोयल और जय भगवान गोयल तथा समूह की कंपनी ड्रीम होम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और गिल्ड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड पर एक-एक साल की रोक लगाई गई है।
ओमेक्स के पूर्व संयुक्त प्रबंध निदेशक सुनील गोयल को भी एक साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया गया है।
सेबी ने बृहस्पतिवार को पारित अपने आदेश में कहा कि ओमेक्स स्वतंत्र सार्वजनिक शेयरधारकों के जरिये निर्धारित 25 प्रतिशत न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करने में विफल रही। कुछ संस्थाओं ने कंपनी के शेयर ऐसे धन से खरीदे, जो ओमेक्स और उसकी समूह इकाइयों से आया था।
नियामक ने कहा कि कुछ संस्थाओं को कंपनी के शेयर खरीदने के लिए धन उपलब्ध कराया गया और बाद में इन्हीं संस्थाओं को सार्वजनिक शेयरधारक के रूप में दिखाया गया। इस तरह न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी की नियामकीय शर्त को कृत्रिम तरीके से पूरा किया गया।
सेबी के अनुसार, ओमेक्स और उसकी समूह कंपनियों ने डीवीएम रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (डीआरपीएल), गर्व बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और जीत बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (जेबीपीएल) के जरिये कुल 46.50 करोड़ रुपये की राशि भेजी। इस राशि का इस्तेमाल अंततः तीन जून, 2013 और 29 अक्टूबर, 2013 को हुई बिक्री पेशकश (ओएफएस) के दौरान ओमेक्स के अपने शेयर खरीदने के लिए किया गया।
सेबी ने 91 पृष्ठ के आदेश में कहा कि इन लेनदेन को अलग-अलग धन हस्तांतरण या स्वतंत्र शेयर खरीद के रूप में नहीं देखा जा सकता।
नियामक के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी संस्थाओं के जरिये स्वतंत्र सार्वजनिक शेयरधारिता का आभास पैदा करना था, जिनके पास ओमेक्स के शेयर खरीदने के लिए धन कंपनी या उसकी समूह इकाइयों से आया था और बाद में इन्हीं शेयरों के आधार पर नियामकीय अनुपालन दिखाया गया।
सेबी ने कहा कि इस व्यवस्था से स्वतंत्र सार्वजनिक हिस्सेदारी का आभास तो हुआ, लेकिन धन के लेनदेन की पड़ताल से वास्तविक स्थिति अलग सामने आई।
आदेश के अनुसार, तीन जून, 2013 की बिक्री पेशकश के बाद यदि कंपनी से मिले धन से खरीदी गई हिस्सेदारी को सार्वजनिक हिस्सेदारी से हटा दिया जाता, तो ओमेक्स की सार्वजनिक हिस्सेदारी 16.21 प्रतिशत के बजाय करीब 14.57 प्रतिशत रह जाती।
इसी तरह, 29 अक्टूबर, 2013 की बिक्री पेशकश के बाद सार्वजनिक हिस्सेदारी घोषित 20.97 प्रतिशत के बजाय करीब 19.04 प्रतिशत होती।
सेबी ने कहा कि बाद में बोनस शेयर जारी किए जाने के बाद भी वित्तपोषित हिस्सेदारी और उससे जुड़े बोनस शेयरों को हटाने पर सार्वजनिक हिस्सेदारी 25.01 प्रतिशत के बजाय करीब 22.71 प्रतिशत रह जाती।
सेबी ने इस व्यवस्था को प्रतिभूतियों में कारोबार से जुड़ी धोखाधड़ीपूर्ण और भ्रामक योजना करार दिया और सेबी अधिनियम तथा धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार रोकथाम नियमों के प्रावधानों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकाला।
नियामक ने ओमेक्स और संबंधित पक्षों को न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी तथा शेयरधारिता के स्वरूप के खुलासे से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी जिम्मेदार ठहराया।
भाषा योगेश रमण
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