मुंबई, 25 सितंबर (भाषा) मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने एक विचाराधीन कैदी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी धार्मिक मन्नत के कारण जेल में बाल कटवाने के नियमों से छूट मांगी थी।
अदालत ने कहा कि लंबे बाल रखने की अनुमति देने से कैदियों में जूँ और कवक के कारण होने वाली त्वचा संबंधी समस्या जैसी संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं।
बृहस्पतिवार को एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) अदालत के विशेष न्यायाधीश ए.ए. जोगलेकर ने जेरी फिलिप्स जैकब्स की याचिका खारिज कर दी। जैकब्स को मानव तस्करी के एक मामले में आर्थर रोड जेल में रखा गया है। उस पर भारतीयों को लाओस भेजकर उनसे जबरन गैर-कानूनी साइबर अपराध करवाने का आरोप है।
विचाराधीन कैदी ने दावा किया कि उसने और उसके परिवार ने अपने कुल देवता के समक्ष सिर मुंडवाने की मन्नत रखी है।
जैकब्स ने यह कहते हुए कि उसने ‘‘नेक नीयत और धार्मिक इरादे’’ से याचिका दायर की है, अदालत से अनुरोध किया कि जेल अधिकारियों को उसे अपना बाल यथावत रखने की इजाजत देने का निर्देश दिया जाए।
हालांकि, आर्थर रोड जेल के अधिकारियों ने दलील दी कि लंबे बाल रखने की इजाजत देने से सिर की त्वचा और शरीर के अन्य अंगों की त्वचा पर संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं, जिनके लिए लंबे समय तक इलाज कराना पड़ सकता है।
इसके अलावा, जेल अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेल नियमावली के नियम 15, उप-नियम (4) के तहत, बाल यथावत रखने की छूट सिर्फ सिख कैदियों को ही दी गई है और यह जैकब्स पर लागू नहीं हो सकती।
अदालत ने जेल की रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा कि ‘‘इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि इतने लंबे बाल और दाढ़ी रखने से साथी कैदियों में जूँ, कवक संक्रमण और दाद, खाज और खुजली की समस्या हो सकती है, जिसके इलाज में लंबा समय लगता है।
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इन बीमारियों के संक्रामक होने को ध्यान में रखते हुए जेल अधिकारियों को कोई निर्देश देना उचित नहीं होगा।
भाषा सुभाष नरेश
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