सेबी ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर गैर-लाभकारी इकाइयों के लिए पंजीकरण वैधता अवधि बढ़ाई

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सेबी ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर गैर-लाभकारी इकाइयों के लिए पंजीकरण वैधता अवधि बढ़ाई

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  • Publish Date - April 16, 2026 / 03:08 PM IST,
    Updated On - April 16, 2026 / 03:08 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने गैर-लाभकारी इकाइयों के लिए सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकरण वैधता अवधि बढ़ा दी है। इन इकाइयों को बिना कोई कोष जुटाये तीन साल के लिए गैर-सरकारी संगठन के रूप में पंजीकरण की अनुमति दी गयी है।

साथ ही शून्य ब्याज शून्य मूलधन (जेडसीजेडपी) वाला बॉन्ड जारी करने के लिए न्यूनतम बोली आवश्यकता को कम कर दिया गया है।

शून्य ब्याज शून्य मूलधन उत्पाद की संरचना बॉन्ड के समान होती है। एक पारंपरिक बॉन्ड में, जारीकर्ता को परिपक्वता पर ब्याज और मूलधन का भुगतान करना होता है। हालांकि, चूंकि जेडसीजेडपी उत्पाद ऋण के बजाय दान मांगने वाले संगठनों द्वारा जारी किए जाते हैं, इसलिए जारीकर्ता को इकाइयों को ब्याज (शून्य कूपन) या मूलधन (शून्य मूलधन) वापस करने की आवश्यकता नहीं होती है।

सेबी ने बुधवार को जारी अपने परिपत्र में कहा कि इन कदमों का उद्देश्य सोशल स्टॉक एक्सचेंज को बढ़ावा देना, पूंजी जुटाने में सुगमता प्रदान करना और गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ) की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने वैधता अवधि को मौजूदा के दो साल से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया है। इस दौरान गैर-लाभकारी संगठन कोष जुटाए बिना शेयर बाजार में पंजीकृत रह सकते हैं।

सेबी ने गैर-लाभकारी संगठनों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय किया है। इन चुनौतियों में वैधानिक और नियामकीय मंजूरी में देरी शामिल है।

नियामक ने कहा, ‘‘ एक गैर-लाभकारी संगठन सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकरण करा सकता है और पंजीकरण की तारीख से दो वर्षों की अवधि के लिए इसके माध्यम से कोष नहीं जुटाने पर उसे छूट है। इस दो वर्ष की अवधि को एक अतिरिक्त वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, यह शेयर बाजार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।

इसके अतिरिक्त, नियामक ने गैर-लाभकारी संगठनों के लिए कोष जुटाने में लचीलापन बढ़ाने के लिए शून्य ब्याज शून्य मूलधन उत्पादों के लिए न्यूनतम बोली आवश्यकता को 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया है।

सेबी ने कहा कि यह छूट केवल उन परियोजनाओं पर लागू होगी जहां लागत और परिणाम स्पष्ट रूप से प्रति इकाई आधार पर लागू किए जा सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि आंशिक बोली या अभिदान से परियोजना के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

ऐसे मामलों में, एसएसई को यह सुनिश्चित करने के लिए उचित जांच-पड़ताल करनी होगी कि कम बोली सीमा पर जुटाई गई राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सार्थक रूप से किया जा सके। नियामक ने यह भी कहा कि यदि न्यूनतम बोली आवश्यकता पूरी नहीं होती है तो निवेशकों को राशि वापस कर दी जाएगी।

सेबी ने कहा, ‘‘न्यूनतम बोली राशि जेडसीजेडपी जारी करके जुटाई जाने वाली राशि का 75 प्रतिशत होनी चाहिए। न्यूनतम बोली राशि 50 प्रतिशत होगी यदि जुटाई गई राशि का उपयोग इस प्रकार किया जा सके कि वह जारी करने के समय घोषित उद्देश्य के अनुरूप हो ताकि परियोजना का क्रियान्वयन व्यावहारिक और सार्थक बना रहे।’’

परिपत्र के अनुसार, ‘‘इसके लिए, एसएसई इस तरह के आंशिक कोष जुटाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी देने से पहले, यह सुनिश्चित करने के लिए उचित जांच-पड़ताल करेगा कि जुटायी गयी राशि का उपयोग सार्थक तरीके से किया जा सकता है। इसमें कोष जुटाने के दस्तावेज में उल्लेखित बोली परिदृश्यों को ध्यान में रखा जाएगा।’’

उल्लेखनीय है कि सेबी निदेशक मंडल ने मार्च में खुदरा भागीदारी बढ़ाने और एसएसई में गैर-लाभकारी संगठनों के लिए कोष जुटाने को आसान बनाने के उद्देश्य से, सामाजिक प्रभाव कोष में व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा आवश्यक न्यूनतम निवेश को मौजूदा दो लाख रुपये से घटाकर 1,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

भाषा रमण अजय

अजय