विड़िण्गम बंदरगाह हिस्सेदारी मामले में सेबी, शेयर बाजार हस्तक्षेप करे: पिनराई विजयन

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विड़िण्गम बंदरगाह हिस्सेदारी मामले में सेबी, शेयर बाजार हस्तक्षेप करे: पिनराई विजयन

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  • Publish Date - July 4, 2026 / 05:12 PM IST,
    Updated On - July 4, 2026 / 05:12 PM IST

कन्नूर, चार जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शनिवार को कहा कि उन्होंने बाजार नियामक सेबी और शेयर बाजारों को पत्र लिखकर अदाणी समूह द्वारा विड़िण्गम बंदरगाह परियोजना में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के प्रस्तावित हस्तांतरण के मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

विजयन ने आरोप लगाया कि यह कदम केरल सरकार के साथ हुए समझौते का उल्लंघन है।

हाल ही में, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) ने घोषणा की थी कि ‘मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी’(एमएससी) लगभग 1.4 अरब डॉलर में अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लि. (एवीपीपीएल) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करेगी।

विजयन ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि इस प्रस्तावित लेनदेन में न केवल रियायत समझौते के संभावित उल्लंघन का मामला शामिल है, बल्कि जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी जुड़े हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सभी पहलुओं पर विचार किये जाने पर यह स्पष्ट होता है कि इन घटनाक्रमों के पीछे एक सुनियोजित और पूर्वनियोजित व्यावसायिक रणनीति रही है।’’

विजयन ने कहा कि सेबी (सूचीबद्धता दायित्व और खुलासा आवश्यकताएं) विनियमन, 2015 के तहत ऐसे लेन-देन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों का पारदर्शी रूप से खुलासा अनिवार्य है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि तथ्य बताते हैं कि इन घटनाक्रमों की जानकारी समय पर और पारदर्शी तरीके से सेबी और संबंधित प्राधिकरणों को नहीं दी गई। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने सेबी और शेयर बाजारों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अदाणी समूह ने सेबी को प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण की जानकारी दी है, लेकिन केरल सरकार को इसकी सूचना नहीं दी गई और न ही रियायत समझौते के अनुसार पूर्व स्वीकृति ली गई।

उन्होंने समझौते के खंड 5.3.1 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का स्वामित्व हस्तांतरण या 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है।

विजयन ने कहा, ‘‘यह केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है। राज्य सरकार को ऐसे किसी भी हस्तांतरण की आवश्यकता और उसके प्रभाव की जांच करने का अधिकार है। सवाल यह है कि अदाणी समूह निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना यह कदम कैसे आगे बढ़ा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि उनके पत्र में सेबी से अनुरोध किया गया है कि वह अदाणी समूह से इस प्रस्तावित लेन-देन पर स्पष्टीकरण मांगे और यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है तो उचित कार्रवाई करे।

भाषा योगेश रमण

रमण