(रॉरी जोन्स, यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग)
रीडिंग (ब्रिटेन), चार जुलाई (द कन्वरसेशन) ब्रिटेन में लोगों की दशकों तक यह धारणा रही कि एयर कंडीशनर (एसी) ऐसी सुविधा है, जिसकी जरूरत कहीं और होती है। वे इसे अपने घरों के बजाय कार्यालयों, होटलों और अधिक गर्म जलवायु वाले देशों से जोड़कर देखते थे। लेकिन उष्णलहर और बढ़ती गर्मी के कारण यह स्थिति अब बदलने लगी है।
मेरे सहयोगियों और मैंने लगभग 16,000 परिवारों के राष्ट्रीय स्तर पर आधारित ‘इंग्लिश हाउसिंग सर्वे’ के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इससे पता चलता है कि एयर कंडीशनिंग का उपयोग अभी भी अपेक्षाकृत कम है। गर्मियों के दौरान केवल 4.3 प्रतिशत परिवार ही इसका इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका में लगभग 90 प्रतिशत परिवारों में एयर कंडीशनिंग का उपयोग होता है और ऑस्ट्रेलिया में यह आंकड़ा लगभग 75 प्रतिशत है।
हालांकि, इस मामूली राष्ट्रीय औसत के पीछे कहीं अधिक महत्वपूर्ण तस्वीर छिपी हुई है। समाज के सभी वर्गों में एयर कंडीशनिंग का प्रसार समान रूप से नहीं हो रहा है। इसके बजाय, इंग्लैंड में अब ‘कूलिंग डिवाइड’ (शीतलन असमानता) उभरने लगी है, जहां भीषण गर्मी से बचाव के साधनों तक लोगों की पहुंच लगातार इस बात पर निर्भर करती जा रही है कि वे कहां रहते हैं, उनकी आय कितनी है और वे किस प्रकार के मकान में रहते हैं।
ब्रिटेन में एसी का उपयोग करने वाले लोगों से किए गए साक्षात्कारों के दौरान हमने पाया कि वे इसे शायद ही कभी विलासिता की वस्तु बताते थे। इसके बजाय, उन्होंने बताया कि वे गर्म रातों में आराम से सो पाने, अगले दिन काम के दौरान अपनी उत्पादकता बनाए रखने या शिशुओं तथा बुजुर्ग परिजनों को खतरनाक रूप से अधिक तापमान से बचाने के लिए एसी का इस्तेमाल करते हैं।
इस उभरती हुई असमानता का भौगोलिक स्वरूप साफ दिखाई देता है। लंदन और इंग्लैंड के पूर्वी हिस्से में घरों में एसी का उपयोग सबसे अधिक है। इसके बाद ईस्ट मिडलैंड्स और दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड का स्थान आता है। वहीं, उत्तरी क्षेत्रों में लोग अभी भी शीतलन (कूलिंग) के साधनों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत बहुत कम करते हैं।
ये रुझान कोई हैरानी की बात नहीं हैं। लंदन में गर्मियां अपेक्षाकृत अधिक गर्म होती हैं और वहां ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (शहरी ऊष्मा द्वीप) प्रभाव भी अधिक देखने को मिलता है, जहां कंक्रीट की बहुलता और हरियाली की कमी के कारण शहरी क्षेत्र अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी अधिक गर्म हो जाते हैं। लेकिन ये क्षेत्रीय अंतर यह भी दर्शाते हैं कि बढ़ती गर्मी वाली जलवायु के अनुरूप खुद को ढालने की लोगों की क्षमता समान रूप से विकसित नहीं होगी।
आर्थिक असमानताएं भी उतनी ही स्पष्ट हैं। सबसे अधिक आय वाले वर्ग के परिवारों में एसी होने की संभावना, सबसे कम आय वाले परिवारों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। एसी की खरीद और उसका संचालन महंगा होता है, इसलिए यह संपन्न परिवारों की पहुंच में अपेक्षाकृत अधिक होती है।
उच्च तापमान की तरह ही, एसी का खर्च आसानी से वहन करने में सक्षम संपन्न परिवार भी मुख्य रूप से लंदन और इंग्लैंड के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में केंद्रित हैं।
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि भीषण गर्मी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील कई वर्गों की एसी तक पहुंच फिलहाल अपेक्षाकृत कम है।
अधिक उम्र के लोग, एकल अभिभावक वाले परिवार और कम आय वाले अनेक परिवार उन वर्गों में शामिल हैं, जिनके एयर कंडीशनिंग का उपयोग करने की संभावना सबसे कम है, जबकि भीषण गर्मी के दौर में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
सामाजिक आवास और किराये के मकानों में रहने वाले लोग भी अपने घर के मालिकों की तुलना में एसी के उपयोग में पीछे हैं। इसकी वजह शुरुआती लागत, मकान मालिक की अनुमति और एसी लगाने से जुड़ी व्यावहारिक बाधाएं जैसी चुनौतियां हैं।
हालांकि, तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। कुछ संवेदनशील वर्गों में आम आबादी की तुलना में एसी अपनाने की दर अधिक है। शिशुओं, छोटे बच्चों, दिव्यांग व्यक्तियों तथा दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित लोगों वाले परिवारों में एसी का उपयोग अपेक्षाकृत अधिक होने की संभावना है।
एक अन्य उल्लेखनीय निष्कर्ष यह दर्शाता है कि समाज में किस प्रकार बदलाव आया है। जिन परिवारों में कोई सदस्य सप्ताह में कम से कम दो दिन घर से काम करता है, उनमें एसी होने की संभावना अन्य परिवारों की तुलना में 42 प्रतिशत अधिक पाई गई।
अभी शुरुआती दौर में ही शीतलन (कूलिंग) से जुड़ी असमानता का स्वरूप उभरने लगा है। असल सवाल यह है कि क्या हम अभी यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करेंगे कि भीषण गर्मी से सुरक्षा सभी को, विशेषकर सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों को, उपलब्ध हो या फिर तब तक इंतजार करेंगे जब तक वातानुकूलित घर केवल संपन्न और विशेषाधिकार प्राप्त लोगों की सुविधा बनकर न रह जाए।
(द कन्वरसेशन)
देवेंद्र रंजन
रंजन