स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का एक जीवंत प्रकाश-स्तंभ है:आनंदीबेन पटेल

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स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का एक जीवंत प्रकाश-स्तंभ है:आनंदीबेन पटेल

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  • Publish Date - July 4, 2026 / 05:10 PM IST,
    Updated On - July 4, 2026 / 05:10 PM IST

लखनऊ, चार जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का एक जीवंत प्रकाश-स्तंभ है।

राज्यपाल ने शनिवार को जन भवन में स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके उन्हें श्रद्धांजलि दी।

जन भवन के अधिकारीगण एवं कर्मचारियों ने भी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र एवं समाज की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

जन भवन से जारी एक बयान के मुताबिक, राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा,“स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का एक जीवंत प्रकाश-स्तंभ है। उन्होंने अपने अल्प जीवनकाल में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का ऐसा विराट संचार किया, जिसका प्रभाव आज भी संपूर्ण विश्व अनुभव कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद दूरदर्शी राष्ट्रचिंतक, युवा शक्ति के प्रखर प्रेरणा-स्रोत तथा ऐसे युगद्रष्टा थे, जिन्होंने उस समय भारत के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना की, जब देश राजनीतिक पराधीनता और मानसिक निराशा के दौर से गुजर रहा था।”

पटेल ने कहा कि उन्होंने संसार को यह संदेश दिया कि भारत मानवता, करुणा, सहिष्णुता, ज्ञान, आध्यात्मिकता तथा ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ की अनंत परंपरा का प्रतिनिधि है और विश्व को नैतिक एवं आध्यात्मिक नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता रखता है।

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी महापुरुष का सच्चा सम्मान उनके विचारों को अपने आचरण, कार्य और जीवन में उतारने से होता है।

उन्होंने कहा कि आज जब भारत विकसित भारत-2047 के संकल्प के साथ आत्मनिर्भरता, नवाचार, समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब स्वामी विवेकानंद का यह संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर अनंत शक्ति निहित है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने, जागृत करने और सही दिशा में प्रयुक्त करने की है।

बयान के मुताबिक, इस अवसर पर जन भवन के शिक्षा विभाग द्वारा स्वामी विवेकानंद के जीवन, व्यक्तित्व एवं विचारों पर आधारित सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिसमें “स्वामी विवेकानंद की बातें अमल में लाओ” गीत पर भावपूर्ण समूह गायन की प्रस्तुति दी गई।

इसके अलावा वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए ऐतिहासिक उद्बोधन के अंशों को दर्शाया गया। नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से स्वामी जी के सार्वभौमिक बंधुत्व, मानवता, सहिष्णुता एवं भारतीय संस्कृति के शाश्वत संदेश को सजीव एवं प्रभावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया गया।

भाषा आनन्द संतोष

संतोष