मुंबई, चार जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य सरकार एक महीने के भीतर सहकारी शिक्षा कोष को फिर से शुरू करेगी। इसका मकसद कुशल कामगारों की एक नई पीढ़ी तैयार करना और राज्य के सहकारिता नेटवर्क को और मजबूत करना है।
महाराष्ट्र राज्य सहकारिता संघ के एक कार्यक्रम में फडणवीस ने सहकारिता आंदोलन को बनाए रखने के लिए मानव संसाधन में निवेश को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने केंद्र सरकार के हालिया नीतिगत सुधारों का भी जिक्र किया, जिनका लक्ष्य राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करना है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सहकारिता के क्षेत्र में सबसे मजबूत राज्य बना हुआ है, जहां दो लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं और सहकारिता आंदोलन की पहुंच सबसे अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही उस शिक्षा कोष को फिर से शुरू करेगी जिसे पहले बंद कर दिया गया था, ताकि सहकारिता क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित कामगार तैयार किए जा सकें।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंदोलन को बनाए रखने के लिए मानव संसाधन को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन की ताकत को मान्यता देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2021 में एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया था।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कई सुधार किए हैं, जिनमें एक नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति भी शामिल है। इस नीति का मकसद अगले दो दशकों में भारत की जीडीपी में सहकारिता क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करना है।
फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने लगभग 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का डिजिटलीकरण किया है और पांच वर्षों में दो लाख नई समितियां स्थापित करने का निर्णय लिया है।
भाषा
संतोष दिलीप
दिलीप