सीतारमण ने आरबीआई से सीबीडीसी को आगे बढ़ाने, डिजिटल रुपये को मजबूत करने को कहा

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सीतारमण ने आरबीआई से सीबीडीसी को आगे बढ़ाने, डिजिटल रुपये को मजबूत करने को कहा

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 07:38 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 07:38 PM IST

मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक से टोकन व्यवस्था, एजेंटिक एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग के तेजी से हो रहे विकास के बीच अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) पहल को और आगे बढ़ाने तथा डिजिटल रुपये की क्षमताओं को मजबूत करने का आग्रह किया।

वित्त मंत्री ने साइबर सुरक्षा के प्रति भी आगाह किया और वित्तीय सेवा परिवेश से इस मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान देने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि कृत्रिम मेधा (एआई) द्वारा संचालित स्वायत्त प्रणालियों की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं।

सीतारमण ने वैश्विक फिनटेक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ”मैं आरबीआई से आग्रह करती हूं कि वह प्रायोगिक स्तर पर चलाये जा रहे थोक और खुदरा दोनों सीबीडीसी के माध्यम से शुरू की गई पहल को और आगे बढ़ाए तथा विकसित करे। इस समय और वैश्विक बाजारों में गति को भांपते हुए आरबीआई को डिजिटल रुपये से जुड़ी अपनी क्षमताओं को लगातार निखारने की जरूरत है।”

सीतारमण ने कहा कि प्रायोगिक स्तर पर भारत के पहले टोकन वाले कॉरपोरेट बॉन्ड की सफलता ने किसी लेनदेन में संपत्ति और पैसे के पहलुओं के एक साथ हस्तांतरण को सक्षम करने में सीबीडीसी के महत्व को प्रदर्शित किया है।

उनकी यह टिप्पणी आरईसी द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के विनियामक सैंडबॉक्स (नियामकीय दायरे में परीक्षण) के तहत भारत के पहले टोकन वाले कॉरपोरेट बॉन्ड पायलट को पूरा करने के बाद आई है। वित्त मंत्री के अनुसार बॉन्ड और डिजिटल रुपया एक ही क्षण में हस्तांतरित हुए, जिससे लेनदेन उसी दिन पूरा हो गया जिस दिन भुगतान किया गया था।

सीतारमण ने कहा, ”यह मौद्रिक निपटान सीबीडीसी के कारण संभव हुआ। यह दो नियामकों – आरबीआई और सेबी के बीच के तालमेल को भी दर्शाता है।”

वित्त मंत्री ने कहा कि टोकन व्यवस्था गैर जरूरी मध्यस्थों को समाप्त कर सकता है और परिसंपत्ति हस्तांतरण को लगभग तात्कालिक बना सकता है, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि लेनदेन की अधिक गति का मतलब यह भी है कि गलती, धोखाधड़ी और बाजार के झटके भी उसी गति से फैल सकते हैं।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण