मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कृत्रिम मेधा (एआई) के वित्त और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ते उपयोग के मद्देनजर मजबूत जवाबदेही और सुरक्षा उपायों का आह्वान किया।
उन्होंने आगाह किया कि नियामकों और कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तेजी से हो रहे नवाचार आगे चलकर प्रणालीगत जोखिम पैदा न करें।
उन्होंने यहां वैश्विक फिनटेक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एआई वित्तीय निर्णयों और लेनदेन को गति दे सकता है, लेकिन यह धोखाधड़ी, साइबर हमलों और अन्य खामियों को भी अभूतपूर्व गति से फैलाने का कारण बन सकता है।
वित्त मंत्री ने कहा, ”एआई निर्णय लेने में सहायता कर सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी इंसानों और संस्थानों की ही होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि एआई-संचालित निर्णय के परिणाम जितने गंभीर होंगे, समीक्षा, व्याख्या और अपील की आवश्यकता उतनी ही अधिक होगी।
सीतारमण ने कहा कि नियामकों, कंपनी बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन को यह समझना चाहिए कि एआई का उपयोग कहां किया जा रहा है, यह किन निर्णयों को प्रभावित करता है, यह किस आंकड़ों पर निर्भर करता है और यदि तकनीक विफल हो जाती है तो क्या परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, ”उच्च जोखिम वाले उपयोगों में इसके इस्तेमाल से पहले और उनके पूरे जीवन चक्र के दौरान उच्च स्तर की जांच होनी चाहिए।”
सीतारमण ने एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता के इस्तीफे का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उनकी चेतावनी की बारीकी से जांच करने का कोई आधार बनता है। उन्होंने कहा, ”मैं यह बात दहशत पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि व्यापक मानवता के प्रति संस्थागत जवाबदेही पर जोर देने के लिए उठा रही हूं।”
एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता ने इस आशंका से इस्तीफा दिया था कि खुद को बेहतर बनाने वाले एआई मॉडल का अनियंत्रित विकास अंततः मनुष्यों को नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा, ”जब तक ये सुरक्षा उपाय तेजी से लागू नहीं होते और लगातार अद्यतन नहीं होते, तब तक एआई के बेलगाम होने का खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ेगा। यह एक ऐसा जोखिम होगा, जिसे सहन नहीं किया जा सकता।”
सीतारमण ने कहा, ”दक्षता और सुरक्षा प्रतिस्पर्धी उद्देश्य नहीं होने चाहिए। बेहतर संस्थागत डिजाइन को इन्हें एक-दूसरे का पूरक बनाना चाहिए।”
वित्त मंत्री ने भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के विदेशों में बढ़ते विस्तार के बीच एक एकीकृत उद्योग मंच पर विचार करने का प्रस्ताव रखा, जो देश के व्यापक प्रौद्योगिकी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय विनियामक चर्चाओं में एक सामूहिक आवाज दे सके।
उन्होंने कहा कि एआई, फिनटेक और डिजिटल मंच सीमाओं से परे काम करते हैं, जबकि डेटा, लाइसेंसिंग, साइबर सुरक्षा, कराधान, उपभोक्ता संरक्षण और वित्तीय विनियमन को नियंत्रित करने वाले कानून काफी हद तक राष्ट्रीय स्तर के बने हुए हैं।
सीतारमण ने कहा, ”वैश्विक बनने की आकांक्षा रखने वाली किसी भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनी के लिए सीमा पार नियमों से निपटना अब कोई छोटा मामला नहीं रह गया है। इसे उसकी वैश्विक वृद्धि रणनीति का हिस्सा बनना होगा।”
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मंच विदेशी सरकारों और नियामकों के साथ संवाद कर सकता है, उन क्षेत्रों की पहचान कर सकता है जहां मानकों को एक-दूसरे के अनुरूप बनाया जा सकता है, साइबर सुरक्षा और आंकड़ों से जुड़ी व्यवस्थाओं को साझा कर सकता है तथा भारतीय कंपनियों को लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं से निपटने में मदद कर सकता है।
भाषा पाण्डेय रमण
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