मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) देश में माल ढुलाई के तरीके में बदलाव से सालाना करीब सात लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है और लगभग एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसमें मालगाड़ियों के लिए अलग से बने गलियारे (डीएफसी) और विभिन्न परिवहन साधन वाले लॉजिस्टिक पार्क (एमएमएलपी) अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) मुंबई ने शुक्रवार को यह कहा।
आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी ने कहा, ‘‘देश में माल ढुलाई के तरीके में बदलाव से भारत सालाना करीब सात लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है और लगभग एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। तेज और अधिक कुशल माल ढुलाई नेटवर्क तैयार करने में डीएफसी और एमएमएलपी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।’’
उन्होंने कहा कि डीएफसी को एमएमएलपी के साथ जोड़ने से रेल, सड़क और परिवहन के अन्य साधनों को अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकेगा। इससे माल पहुंचाने में लगने वाला समय कम होगा, आपूर्ति श्रृंखला अधिक भरोसेमंद बनेगी और लॉजिस्टिक लागत घटेगी।
तिवारी ने कहा, ‘‘डीएफसी और एमएमएलपी भारत के लिए बड़ा बदलाव लाने वाले साबित हो सकते हैं। लॉजिस्टिक क्षेत्र के विस्तार से परिवहन, भंडारण, वितरण और माल ढुलाई की व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।’’
आईआईएम मुंबई की ‘लॉजिस्टिक क्षेत्र में भविष्य की प्रतिभा आवश्यकताएं : विजन 2047’ रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक लॉजिस्टिक क्षेत्र को करीब 1.15 करोड़ अतिरिक्त पेशेवरों की जरूरत होगी। प्रोफेसर तिवारी के नेतृत्व में तैयार यह रिपोर्ट समीक्षा के लिए शिक्षा मंत्रालय को सौंपी गई है।
भाषा योगेश रमण
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