कुशल रोजगार सृजन, गुणवत्ता में सुधार भारत के अल्पकालिक लक्ष्य: ईएसी-पीएम प्रमुख

कुशल रोजगार सृजन, गुणवत्ता में सुधार भारत के अल्पकालिक लक्ष्य: ईएसी-पीएम प्रमुख

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 05:18 PM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 05:18 PM IST

अहमदाबाद, नौ जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने शुक्रवार को कहा कि भारत के अल्पकालिक लक्ष्यों में कुशल रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देना शामिल है ताकि इस प्रक्रिया में रोजगार की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।

अहमदाबाद विश्वविद्यालय के 7वें वार्षिक अर्थशास्त्र सम्मेलन में देव ने स्वीकार किया कि देश रोजगार की गुणवत्ता में पिछड़ रहा है, जिसे उन्होंने समावेश वृद्धि प्राप्त करने के महत्वपूर्ण घटकों में एक बताया।

आर्थिक वृद्धि को हासिल करने के लिए अल्पकालिक लक्ष्यों के बारे में ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल पर देव ने कहा, ‘‘कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद के वर्ष में 2022-23 से 2025-26 तक औसत वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत है। इसलिए हमने सुधार कर लिया है। भारत जुझारू है। हम सभी बाधाओं के बावजूद निवेश और निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं। हमारा ध्यान रोजगार सृजन एवं कुशल नौकरियों पर है। हम रोजगार की गुणवत्ता में पिछड़ रहे हैं।’’

‘भारतीय अर्थव्यवस्था: वृद्धि, समावेशन एवं स्थिरता’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का मतलब केवल वृद्धि हासिल करना नहीं बल्कि समावेशी वृद्धि भी है।

देव ने कहा, ‘‘ समावेशी वृद्धि हासिल करने में गुणवत्तापूर्ण रोजगार एक महत्वपूर्ण घटक है। रोजगार के क्षेत्र में हमें कई मुद्दों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि ‘गिग वर्कर’, महिलाओं की भागीदारी दर, युवाओं के लिए रोजगार सृजन, कृत्रिम मेधा (एआई) सहित प्रौद्योगिकी। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण भी असमानताओं को कम करने के प्रयासों का हिस्सा हैं। ये वे क्षेत्र हैं जहां समावेश को बढ़ाया जा सकता है।’’

दीर्घकालिक लक्ष्यों पर उन्होंने कहा, ‘‘ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में वृद्धि के दो प्रमुख कारक, निवेश दर एवं घरेलू बचत में वृद्धि और निर्यात को बढ़ावा देना हैं।’’

उन्होंने निर्यात में विविधता लाने, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), आयकर सुधार और श्रम संहिता, साथ ही गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों तथा परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र को शामिल करने की ओर भी इशारा किया।

देव ने कहा कि कई देशों ने विनिर्माण एवं सेवाओं के माध्यम से संरचनात्मक बदलाव हासिल किया है। भारत को श्रम-प्रधान रोजगार सृजित करने के लिए अब भी मजबूत विनिर्माण वृद्धि की आवश्यकता है।

उन्होंने विनिर्माण एवं सेवाओं में से किसी एक को चुनने की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि ये दोनों क्षेत्र प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक हैं।

विनिर्माण पर उन्होंने कहा कि यह सेवाओं में भी वृद्धि को बढ़ावा देता है क्योंकि आधुनिक विनिर्माण में एआई जैसे सेवा घटकों को तेजी से शामिल किया जा रहा है।

देव ने कहा, ‘‘ सेवा क्षेत्र के सतत विस्तार के लिए एक मजबूत विनिर्माण आधार आवश्यक है। 2047 तक हम जो हासिल करना चाहते हैं, वह कोई अनोखी बात नहीं है। भारत ने कई मोर्चों पर प्रगति की है। अब चुनौती एक ऐसे समाज एवं अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने की है जो न केवल समृद्ध हो बल्कि समावेशी और प्रकृति-समर्थक भी हो।’’

भाषा निहारिका पाण्डेय

पाण्डेय