भोपाल, 17 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को कहा कि स्लीमनाबाद सिंचाई सुरंग विंध्य क्षेत्र में जल संकट को काफी हद तक दूर करेगी तथा कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने लगभग 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निरीक्षण करने के बाद जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा कि यह देश की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग है।
उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी का जल खंभात की खाड़ी में चला जाता है, लेकिन विज्ञान का यह चमत्कार है कि इस ऐतिहासिक सुरंग के माध्यम से मां नर्मदा गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के क्षेत्र को हराभरा करेंगी।
यादव ने कहा, ‘‘विंध्य क्षेत्र सभी प्रकार के संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन कुछ इलाके जल संकट से जूझते रहे हैं। स्लीमनाबाद सुरंग कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए जीवनरेखा बनेगी। चित्रकूट क्षेत्र में कुल 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे पेयजल की समस्या का समाधान होगा और कई स्थानों पर बिजली का उत्पादन भी होगा।’’
उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य में सिंचित क्षेत्र बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
यादव ने कहा कि 1,600 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इस परियोजना में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के कारण यह चुनौतीपूर्ण सुरंग परियोजना अब पूर्णता की ओर बढ़ रही है। यह सुरंग क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों के लिए वरदान है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अध्ययन का विषय बनेगी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ स्थानों पर 120 फुट तक गहरी यह सुरंग भीषण भूकंप की स्थिति में भी 100 वर्ष तक सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘एक समय ऐसा था जब इस सुरंग का निर्माण पूरा होना असंभव लग रहा था, लेकिन मजबूत संकल्प और कठिन परिश्रम से सफलता मिली। कठिन चट्टानों के कारण कई बार चुनौतियां आईं, फिर भी पूरी टीम ने दृढ़ निश्चय के साथ काम पूरा किया।’’
यादव ने कहा कि स्लीमनाबाद सुरंग परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के लिए बड़ी सौगात है तथा जल संसाधन विभाग ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सराहनीय कार्य किया है।
उन्होंने किसानों से अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं बेचने का आग्रह करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह क्षेत्र पंजाब और हरियाणा से आगे निकलकर आर्थिक समृद्धि का केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय मध्यप्रदेश में सिंचित क्षेत्र 7.5 लाख हेक्टेयर था, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के दौरान बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हो गया।
उन्होंने दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में यह बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
भाषा
दिमो रवि कांत योगेश
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