नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया ने अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के महत्व को देखते हुए गांवों और छोटे शहरों में उन्हें दिये जाने वाले कर्ज का दायरा बढ़ाने की जरूरत बतायी है।
लोहिया ने मंगलवार को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के एक सम्मेलन में कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) एमएसएमई को कर्ज देने पर ध्यान केंद्रित कर अपने कर्ज कारोबार में विविधता लाने का लक्ष्य भी हासिल कर सकेंगे। नियम-आधारित ऋण मूल्यांकन से उन्हें परिसंपत्तियों की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बयान में कहा कि सम्मेलन में सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रमुखों (चेयरपर्सन), सिडबी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज मित्तल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन में सिडबी-आरआरबी एमएसएमई सह-कर्ज व्यवस्था का विस्तार करने पर चर्चा हुई।
सम्मेलन के दौरान सचिव ने ग्रामीण और छोटे शहरों में एमएसएमई को कर्ज देने का दायरा बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था सिडबी की एमएसएमई की ऋण जरूरतों की समझ और देश के छोटे शहरों तथा गांवों में आरआरबी की व्यापक पहुंच का लाभ उठाएगी।
डीएफएस के अतिरिक्त सचिव देबाशीष पी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए बड़ी संख्या में एमएसएमई तक लक्षित तरीके से पहुंचने के लिए एमएसएमई संकुल से जुड़े आंकड़ों के महत्व का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि आरआरबी को देश को अगली पीढ़ी का विनिर्माण केंद्र बनाने में योगदान देना चाहिए और एमएसएमई के बीच वित्तीय जागरूकता के प्रसार के लिए राज्य सरकारों द्वारा आयोजित रोजगार मेलों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेना चाहिए।
देबाशीष ने आरआरबी को यह भी सुझाव दिया कि वे सह-ऋण व्यवस्था के तहत एमएसएमई को कर्ज देना अपनी शाखाओं के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाएं।
कार्यक्रम में सिडबी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मित्तल ने भी आरआरबी से आगे आकर इस व्यवस्था को सफल बनाने में योगदान देने का आग्रह किया।
सिडबी ने सह-ऋण मंच विकसित किया है। यह एक पूरी तरह डिजिटल मंच है, जो तेज और कागजरहित ऋण प्रक्रिया उपलब्ध कराता है। इससे कर्ज को जल्द मंजूरी देने और वितरित करने में मदद मिलती है।
सिडबी ने कहा कि आवेदन पोर्टल के माध्यम से सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के बाद आवेदकों को कर्ज को लेकर बहुत कम समय में सैद्धांतिक मंजूरी की जानकारी दी जाएगी।
डिजिटल दस्तावेज और कर्ज वितरण की प्रक्रिया यह भी सुनिश्चित करती है कि ग्राहकों को किसी भी चरण में शाखा जाने की जरूरत न पड़े और कर्ज सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच जाए।
बयान में कहा गया कि तीन आरआरबी में इस व्यवस्था के शुरुआती प्रयोग के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। अब इस सह-ऋण कार्यक्रम को और अधिक आरआरबी तक विस्तारित किए जाने से ग्रामीण और छोटे शहरों में खासकर सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के कर्जदारों की ऋण जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।
भाषा रमण अजय
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