नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कोलकाता की कंपनी राजा उद्योग के खिलाफ शुरू की गई दिवाला कार्यवाही रद्द कर दी है।
न्यायाधिकरण ने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का आदेश पारित होने के समय कंपनी पर बकाया राशि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत निर्धारित एक करोड़ रुपये की न्यूनतम सीमा से कम थी।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने एनसीएलटी की कोलकाता पीठ के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि कंपनी ने 20 जून से 20 जुलाई, 2026 के बीच 2.25 करोड़ रुपये की पूरी मूल राशि चुका दी थी।
एनसीएलटी के आदेश के समय केवल 93,88,310 रुपये बकाया थे, जो आईबीसी के तहत निर्धारित एक करोड़ रुपये की सीमा से कम है।
आईबीसी, 2016 की धारा चार के तहत किसी कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू करने के लिए कम से कम एक करोड़ रुपये की चूक होना जरूरी है।
न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान और नरेश सालेचा की पीठ ने कहा कि एनसीएलटी का आदेश पारित होने के दिन कंपनी पर केवल 93,88,310 रुपये बकाया थे। यह राशि एक करोड़ रुपये की निर्धारित सीमा से कम होने के कारण एनसीएलटी का आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
एनसीएलटी ने 20 जुलाई, 2026 को राजा उद्योग के खिलाफ सीआईआरपी शुरू करने की अनुमति दी थी, जिसे कंपनी ने एनसीएलएटी में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान कंपनी के वित्तीय ऋणदाताओं ने एनसीएलएटी को बताया कि उनके बीच विवाद का निपटारा हो गया है।
एनसीएलएटी ने कहा कि ऋणदाताओं को 27 जुलाई तक बड़ी राशि का भुगतान मिलने के बाद इसकी जानकारी एनसीएलटी को देनी चाहिए थी।
ऐसा किए जाने पर संभवत: कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में भेजने का आदेश ही नहीं दिया जाता।
भाषा योगेश अजय
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