नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को बंदरगाह संचालन की समीक्षा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान पोत परिवहन से जुड़े शुल्कों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और स्थिति का लाभ उठाकर मुनाफाखोरी न होने दी जाए।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री ने नौवहन महानिदेशालय (डीजीएस) को निर्देश दिया कि सभी शुल्क स्पष्ट रूप से दर्ज और निगरानी में रहें, ताकि व्यापार हितों की रक्षा हो सके।
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुए व्यवधान के बीच समय पर सरकारी हस्तक्षेप करने से जहाजों पर फंसे करीब 90 प्रतिशत माल को निकाल लिया गया है।
सोनोवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण शुरुआती दौर में माल की आवाजाही और जहाजों के संचालन पर असर पड़ा, लेकिन समन्वित एवं त्वरित कदमों से बंदरगाह संचालन को सामान्य करने में मदद मिली और इसका व्यापार पर प्रभाव सीमित रहा।
सोनोवाल ने विभिन्न बंदरगाहों की स्थिति की समीक्षा करते हुए सुधार पर संतोष जताया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि मंत्रालय द्वारा ग्राउंड रेंट में छूट और रीफर शुल्क में रियायत जैसे राहत उपायों की घोषणा का लाभ बिना देरी हितधारकों तक पहुंचाया जाए।
समीक्षा के दौरान उन्होंने बंदरगाहों पर शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के भी निर्देश दिए, ताकि व्यवधान के समय समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
अधिकारियों ने कहा कि जवाहरलाल नेहरु बंदरगाह, दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण, न्यू मैंगलोर बंदरगाह प्राधिकरण और मुंबई बंदरगाह जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर फंसे अधिकांश माल को हटाया जा चुका है।
अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज बंदरगाह से गुजरने वाला पोत परिवहन मार्ग प्रभावित हुआ, जो खाड़ी देशों से वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है।
हालांकि ईरान ने कहा है कि ‘गैर-शत्रु’ देशों के जहाज समन्वय के बाद इस मार्ग से गुजर सकते हैं।
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