(तस्वीरों के साथ)
पोर्ट लुईस, 10 अप्रैल (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत मॉरीशस के साथ संबंधों को लेन-देन के रूप में नहीं, बल्कि “स्थायी रिश्तों” के रूप में देखता है और देश एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में हमेशा मॉरीशस के साथ खड़ा रहेगा।
मंत्री ने पोर्ट लुईस में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया “गहरे उथल-पुथल और अनिश्चितता” के दौर से गुजर रही है तथा ऐसे समय में “हमारे जैसे साझेदार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।”
जयशंकर नौवें हिंद महासागर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मॉरीशस में हैं। उन्होंने पोर्ट लुईस में जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में एक गुर्दा प्रत्यारोपण इकाई का उद्घाटन किया।
जयशंकर ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि मॉरीशस साझेदार नहीं है, मॉरीशस परिवार का हिस्सा है।”
मोदी का संदेश साझा करते हुए उन्होंने कहा, “यह ‘दिल का रिश्ता’ है, जो सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि सार्थक पहलों में भी झलकता है।”
विदेश मंत्री ने कहा, “मॉरीशस की पहली समर्पित गुर्दा प्रत्यारोपण इकाई का उद्घाटन वास्तव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सिर्फ चिकित्सा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि आशा का पल है।”
जयशंकर ने हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों का भी जिक्र किया और मॉरीशस से कहा कि “आपकी सुरक्षा ही हमारी सुरक्षा है।”
उन्होंने कहा, “एक बड़े महासागरीय देश के रूप में मॉरीशस को विशिष्ट चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत एक समुद्री साझेदार के रूप में प्रतिबद्ध है। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के हमारे जहाज, मॉरीशस नेशनल कोस्ट गार्ड के साथ मिलकर आपके जलक्षेत्र की सुरक्षा करते हैं और हम मॉरीशस को उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की निगरानी में लगातार सहायता देते हैं, क्योंकि आपकी सुरक्षा ही हमारी सुरक्षा है।”
जयशंकर ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम को उनके नेतृत्व और “इस विशेष साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता” के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, “दुनिया आज उथल-पुथल और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में हमारी साझेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हम संबंधों को लेन-देन के रूप में नहीं, बल्कि स्थायी रिश्तों के रूप में देखते हैं। भारत एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में हमेशा मॉरीशस के साथ खड़ा रहेगा।”
भाषा
राखी पारुल
पारुल