बीते सप्ताह सोयबीन तिलहन, मूंगफली तेल-तिलहन में सुधार, सरसों तेल-तिलहन में गिरावट

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बीते सप्ताह सोयबीन तिलहन, मूंगफली तेल-तिलहन में सुधार, सरसों तेल-तिलहन में गिरावट

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  • Publish Date - June 21, 2026 / 09:28 AM IST,
    Updated On - June 21, 2026 / 09:28 AM IST

नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) आम तौर पर बाजार में लिवाली प्रभावित रहने के बीच बीते सप्ताह तेल-तिलहन बाजारों में सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चे पामतेल (सीपीओ) और बिनौला तेल के दाम गिरावट के साथ बंद हुए। सोयाबीन के बड़े प्लांट वालों द्वारा खरीद दाम बढ़ाने के कारण सोयाबीन तिलहन, आयातित सूरजमुखी तेल से सस्ता होने और मांग बढ़ने के कारण मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया। औद्योगिक मांग के बीच पामोलीन तेल के दाम अपरिवर्तित रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि देश में किसानों या फिर प्लांट वालों के पास सरसों की उपलब्धता है। आयातित तेलों की वजह से बाजार में 20-25 प्रतिशत तक मांग कम है। ऊंचे दाम पर कमजोर लिवाली के बीच बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन के दाम में गिरावट रही।

उन्होंने कहा कि पिछले 20-22 दिन में सोयाबीन की खरीद का दाम 300-400 रुपये क्विंटल तक घटाया गया था जिसकी वजह से इससे काफी बेहतर दाम का स्वाद ले चुके किसान अब आवक कम लाने लगे हैं। इसके कारण महाराष्ट्र के लातूर में बड़े प्लांट वालों ने सोयाबीन का खरीद दाम बढ़ाया है। इस वजह से बीते सप्ताह सोयाबीन तिलहन के दाम में सुधार देखा जा रहा है। दूसरी ओर लागत से नीचे दाम पर बिकवाली होने के कारण सोयाबीन तेल तथा कच्चे पामतेल (सीपीओ) के दाम में गिरावट आई।

औद्योगिक मांग होने तथा मूंगफली और बिनौला तेल से सस्ता होने के कारण पामोलीन तेल की मांग है और इस वजह से बीते सप्ताह पामोलीन तेल के दाम स्थिर बने रहे।

उन्होंने कहा कि महाराट्र के लातूर में सहकारी संस्था नाफेड ने जो शनिवार को निविदा मंगाई थी, उनमें नीचे दाम वाली बोलियों को निरस्त कर दिया गया। नाफेड का यह समझदारी वाला कदम किसानों के हक में माना जा रहा है। यह सोयाबीन में आज आये सुधार का मुख्य कारण है।

आयातित सूरजमुखी तेल से सस्ता होने के कारण मूंगफली तेल-तिलहन की मांग बनी हुई है जिससे मूंगफली तेल-तिलहन में सुधार आया। नगण्य उपलब्धता के बीच बाजार धारणा प्रभावित रहने के बीच बिनौला तेल के दाम में भी गिरावट आई।

सूत्रों ने कहा कि लगभग तीन वर्ष पहले बंदरगाहों पर मूंगफली तेल का थोक दाम 150 रुपये किलो हुआ करता था और उस समय सूरजमुखी तेल का दाम 90 रुपये किलो था। मौजूदा स्थिाति में मूंगफली का उत्पादन पहले से काफी बढ़ा है। अब की स्थिति में सूरजमुखी तेल का दाम 166 रुपये किलो बैठता है जबकि मूंगफली तेल का दाम 155.50 रुपये किलो बैठता है।

उन्होंने कहा कि देश में उत्पादन बढ़ाने का फायदा यह हुआ है कि किसानों को भी बेहतर दाम मिले, आयात पर निर्भरता में मामूली कमी आने से भी विदेशी मुद्रा की बचत हुई और आयातित तेलों के मुकाबले देशी तेलों का दाम कहीं सस्ता बैठता है।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 150 रुपये की गिरावट के साथ 7,525-7,550 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों तेल 225 रुपये की गिरावट के साथ 15,425 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल क्रमश: 35-35 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,550-2,650 रुपये और 2,550-2,695 रुपये टिन (15 किलो) पर मजबूत बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 25-25 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 7,000-7,050 रुपये और 6,850-6,925 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

दूसरी ओर, दिल्ली में सोयाबीन तेल 150 रुपये की गिरावट के साथ 15,450 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 150 रुपये की गिरावट के साथ 15,400 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 50 रुपये की गिरावट के साथ 11,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

मांग रहने के बीच बीते सप्ताह मूंगफली तिलहन का दाम 50 रुपये के सुधार के साथ 6,625-7,200 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 70 रुपये के सुधार के साथ 15,550 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 20 रुपये के सुधार के साथ 2,480-2,780 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 75 रुपये की गिरावट के साथ 13,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दूसरी ओर औद्योगिक मांग के बीच पामोलीन दिल्ली 15,550 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल 14,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रुख के साथ बंद हुआ।

कारोबारी धारणा प्रभावित रहने के कारण बिनौला तेल का दाम 400 रुपये की गिरावट के साथ 15,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

भाषा

राजेश

अजय

अजय