क्यूसीओ हटने से बढ़ा स्टेनलेस स्टील आयात, एमएसएमई की सरकार से इसे फिर लागू करने की मांग

क्यूसीओ हटने से बढ़ा स्टेनलेस स्टील आयात, एमएसएमई की सरकार से इसे फिर लागू करने की मांग

क्यूसीओ हटने से बढ़ा स्टेनलेस स्टील आयात, एमएसएमई की सरकार से इसे फिर लागू करने की मांग
Modified Date: June 25, 2026 / 11:28 am IST
Published Date: June 25, 2026 11:28 am IST

नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) स्टेनलेस स्टील क्षेत्र के 100 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने सरकार से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) को फिर से लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि आदेश हटाए जाने के बाद चीन से आयात में तेज वृद्धि हुई है।

इस्पात मंत्रालय ने 27 अप्रैल को एक आदेश के जरिये विभिन्न स्टेनलेस स्टील उत्पादों के लिए केवल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणित वस्तुओं के उपयोग को अनिवार्य बनाने वाले गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को स्थगित कर दिया था। यह कदम घरेलू विनिर्माण के लिए कच्चे माल की उपलब्धता आसान बनाने तथा विशेष रूप से एमएसएमई इकाइयों पर अनुपालन बोझ कम करने के उद्देश्य से उठाया गया था।

स्टेनलेस स्टील उद्योग के एमएसएमई ने हालांकि, आदेश स्थगित होने के बाद स्टेनलेस स्टील उत्पादों के आयात में आई तेज वृद्धि पर चिंता जताई है।

उद्योग संगठनों, स्टेनलेस स्टील इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन और स्टेनलेस स्टील री-रोलर्स एसोसिएशन ने इस्पात मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा, ‘‘ क्यूसीओ के स्थगन से चीन से कम कीमत वाले आयात का रास्ता खुल गया है। इससे घरेलू एमएसएमई विनिर्माताओं पर भारी दबाव पड़ रहा है और हजारों नौकरियों तथा भारतीय उद्यमियों द्वारा किए गए बड़े निवेश पर खतरा मंडरा रहा है।’’

संगठनों ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अप्रैल 2026 में स्टेनलेस स्टील का आयात 1,01,252 मीट्रिक टन रहा, जो एक वर्ष पहले के इसी महीने के 61,143 मीट्रिक टन की तुलना में 65 प्रतिशत अधिक है। मार्च 2026 के 59,917 मीट्रिक टन की तुलना में अप्रैल में आयात 69 प्रतिशत बढ़ा।

उद्योग संगठनों के सदस्यों ने आगाह किया कि यदि सरकार ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया तो आयात के आंकड़े आगे भी बढ़ सकते हैं।

एमएसएमई इकाइयों ने मंत्रालय को भेजे पत्र में कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेश और रोजगार दोनों जोखिम में हैं।

संगठनों ने कहा कि चीनी स्टेनलेस स्टील उत्पाद बेहद कम कीमतों पर भारतीय बाजार में आ रहे हैं, जिससे घरेलू विनिर्माताओं के लिए असमान प्रतिस्पर्धी माहौल बन रहा है। भारतीय कंपनियां गुणवत्ता मानकों, पर्यावरणीय नियमों और रोजगार संबंधी दायित्वों का पालन करती हैं, जबकि आयातित उत्पाद इन मानकों पर खरे नहीं उतरते।

स्टेनलेस स्टील इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा, ‘‘ ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने की सरकारी नीति और प्रतिबद्धता पर भरोसा करते हुए अनेक एमएसएमई इकाइयों ने क्षमता विस्तार, प्रौद्योगिकी उन्नयन, गुणवत्ता सुधार और रोजगार सृजन में भारी निवेश किया है।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में