नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) भारत में स्टार्टअप कंपनियों को कर्ज के जरिये मिलने वाले वित्तपोषण में तेजी आई है। वर्ष 2025 में बिना हिस्सेदारी दिए मिलने वाला कर्ज (उद्यम ऋण) 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि बड़ी कंपनियों के विस्तार के लिए दिया जाने वाला कर्ज (वृद्धि ऋण) 1.68 अरब डॉलर रहा।
स्ट्राइड वेंचर्स की बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह रुझान स्टार्टअप वित्तपोषण के तरीके में बड़े बदलाव का संकेत है। पहले इस तरह का कर्ज केवल कंपनियों की नकदी जरूरत (रनवे) बढ़ाने तक सीमित था लेकिन अब इसका इस्तेमाल विस्तार, अधिग्रहण और कारोबार को मजबूत करने में भी हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में करीब 187 स्टार्टअप कंपनियों ने उद्यम ऋण लिया। इसमें दिल्ली-एनसीआर 61.7 करोड़ डॉलर के ऋण के साथ सबसे आगे रहा और इसके बाद बेंगलुरु एवं मुंबई का स्थान रहा।
क्षेत्रवार देखें तो वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियों को सबसे ज्यादा 60 करोड़ डॉलर से अधिक का वित्त मिला, जबकि उपभोक्ता क्षेत्र में सबसे ज्यादा सौदे हुए।
वहीं, वृद्धि के लिए कर्ज मुख्य रूप से बड़ी और परिपक्व कंपनियों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। 2025 में 32 सौदों के जरिये 1.68 अरब डॉलर जुटाए गए, जिसमें मुंबई आगे रहा।
रिपोर्ट कहती है कि पिछले कुछ वर्षों में इस तरह का कर्ज आधारित वित्तपोषण तेजी से बढ़ा है और अब यह कुल स्टार्टअप निवेश का लगभग नौ प्रतिशत हो चुका है।
इस सर्वेक्षण में शामिल 70 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप संस्थापकों का मानना है कि आने वाले दो वर्षों में इस तरह के वित्तपोषण का इस्तेमाल और बढ़ेगा।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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