स्टार्टअप नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रहे हैं: पूर्व राष्ट्रपति कोविंद

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स्टार्टअप नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रहे हैं: पूर्व राष्ट्रपति कोविंद

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  • Publish Date - February 15, 2026 / 04:14 PM IST,
    Updated On - February 15, 2026 / 04:14 PM IST

नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कहा कि भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में उभरा है, जिसमें दो लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप देश भर में नवाचार और रोजगार सृजन को गति दे रहे हैं।

कोविंद ने जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीटो) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि इसके साथ ही, 100 से अधिक स्टार्टअप ने ‘यूनिकॉर्न’ का दर्जा हासिल कर लिया है। यूनिकॉर्न से आशय एक अरब डॉलर से अधिक के मूल्यांकन से है।

‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के लिए वैश्विक दिग्गजों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के एकत्रित होने के बीच उन्होंने कहा कि यह प्रभावशाली वैश्विक रैंकिंग और उच्च-मूल्य वाले स्टार्टअप की विशाल संख्या भारत के कोने-कोने से उभर रहे नवाचार, रोजगार सृजन और विश्व स्तरीय उद्यमों को दर्शाती है।

जीटो की राष्ट्रीय स्टार्टअप पहल ‘इल्युमिन 8’ में निवेशकों और परामर्शदाताओं को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा, ‘‘व्यवसाय और मूल्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि भागीदार हैं। लाभ और उद्देश्य को एक साथ आगे बढ़ना चाहिए।’’

उन्होंने उल्लेख किया कि जैन सिद्धांत इस गहरी समझ को दर्शाते हैं कि जो समाज केवल लाभ पर ध्यान केंद्रित करता है लेकिन मूल्यों की उपेक्षा करता है, वह कुछ समय के लिए तो आगे बढ़ सकता है, लेकिन धीरे-धीरे अपना मार्ग भटक जाता है।

दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि समाज की सेवा करने वाला धन सार्थक हो जाता है और नैतिकता में निहित उद्यम चिरस्थायी बन जाता है।

इस अवसर पर ‘जीटो इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन फाउंडेशन’ के चेयरमैन जिनेंद्र भंडारी ने कहा कि भारत की स्टार्टअप गाथा अब केवल मूल्यांकन के बारे में नहीं है, बल्कि यह वास्तविक अर्थव्यवस्था के लिए मूल्य सृजन के बारे में है।

उन्होंने कहा कि ‘स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0’ जैसी पहल सहित सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता एक शक्तिशाली संकेत देती है कि जोखिम लेने और नवाचार को न केवल स्वीकार किया जाता है बल्कि प्रोत्साहित भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत के संस्थापक केवल कंपनियां नहीं बना रहे हैं, बल्कि वे आर्थिक गतिशीलता, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का निर्माण कर रहे हैं।

भाषा सुमित अजय

अजय