वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए इस्पात उद्योग को नए बाजार तलाशने होंगे: अधिकारी
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए इस्पात उद्योग को नए बाजार तलाशने होंगे: अधिकारी
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) भारतीय इस्पात उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए नए निर्यात बाजारों की तलाश करने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में तेजी से कदम उठाने होंगे। एक सरकारी अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
इस्पात मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार अश्विनी कुमार ने कहा कि वैश्विक व्यापार परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और कई देश अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए संरक्षणवादी उपाय अपना रहे हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एसोचैम के ‘इंडिया स्टील कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘तेजी से बदलते व्यापारिक माहौल, कार्बन सीमा उपाय और शुल्क कार्रवाई के बीच भारतीय इस्पात उद्योग को कार्बन उत्सर्जन में कमी लानी होगी, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को मजबूत करना होगा तथा निर्यात बाजारों का विविधीकरण करना होगा।”
कुमार ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) दोनों ने अपने उद्योगों को समर्थन देने के लिए कदम उठाए हैं। अमेरिका ने ‘सेक्शन 232’ के तहत उपाय लागू किए हैं, जबकि ईयू ने ‘कार्बन सीमा समायोजन तंत्र’ (सीबीएएम) जैसे प्रावधान लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य उच्च कार्बन उत्सर्जन वाली उत्पादन प्रक्रियाओं से बने इस्पात पर नियंत्रण रखना है।
आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएमएनएस इंडिया) के कॉरपोरेट संचार प्रमुख तुषार मक्कड़ ने वैश्विक हालात के बीच कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति की ज़रूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘कच्चे माल की सुरक्षा एक रणनीतिक चिंता बनी हुई है। भारत अपनी कोकिंग कोयले की ज़रूरत के लगभग 85 प्रतिशत आयात पर निर्भर है, जिससे उत्पादकों को आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट, माल ढुलाई के खर्च में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक जोखिम और कच्चे माल की कीमतों में बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, भविष्य में क्षमता बढ़ाने के लिए लौह अयस्क के स्रोतों तक भरोसेमंद और लंबे समय तक पहुंच सुनिश्चित करना भी बहुत जरूरी है।’’
भाषा यासिर अजय
अजय

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