नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने रविवार को कहा कि वायदा और विकल्प (एफएंडओ) खंड में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने का मकसद सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करना और प्रणालीगत जोखिम को संभालना है।
बजट में वायदा अनुबंधों पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा, विकल्प सौदों पर एसटीटी को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। अभी तक एसटीटी विकल्प प्रीमियम पर 0.1 प्रतिशत और विकल्प ‘एक्सरसाइज’ पर 0.125 प्रतिशत था।
बजट के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्रीवास्तव ने कहा कि एफएंडओ में सट्टेबाजी के कारण छोटे और खुदरा निवेशकों को नुकसान हो रहा था। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का इरादा सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करना है, और यही वजह है कि दर में वृद्धि की गई है।
उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से वायदा-विकल्प बाजारों में प्रणालीगत जोखिम को संभालने के लिए है।
सेबी के अध्ययनों के अनुसार, एफएंडओ खंड में 90 प्रतिशत से अधिक खुदरा निवेशकों को नुकसान होता है। बाजार नियामक ने इस खंड में कारोबार कम करने के लिए पहले भी कम कदम उठाए हैं।
श्रीवास्तव ने कहा कि इस वृद्धि के बाद भी एसटीटी की दरें होने वाले लेनदेन की मात्रा की तुलना में मामूली रहेंगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अत्यधिक सट्टेबाजी की गतिविधियों को हतोत्साहित करने और अधिक संतुलित बाजार संरचना को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कुछ लोगों ने चेतावनी दी है कि यह निकट अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।
भाषा पाण्डेय अजय
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