केजी-बेसिन गैस विवाद में उच्चतम न्यायालय ने सुलह प्रक्रिया पर सहमति जताई

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केजी-बेसिन गैस विवाद में उच्चतम न्यायालय ने सुलह प्रक्रिया पर सहमति जताई

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 11:32 AM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 11:32 AM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की उस नयी अर्जी को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कंपनी ने केंद्र सरकार के साथ कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की अनुमति मांगी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की ओर से किए गए उल्लेख का संज्ञान लिया।

सिब्बल ने अदालत से कहा कि सुलह की प्रक्रिया के लिए आवेदन किया गया है, जिस पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा कि सरकार इस अनुरोध पर विचार करने को तैयार है।

इस पर शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी। पीठ ने कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकाल लेते हैं, तो अपील का निपटारा कर दिया जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “यदि विवाद सुलह के जरिए सुलझता है तो हमें खुशी होगी। आप समझौते के साथ आते हैं तो हम अपील का निपटारा कर देंगे।”

शीर्ष अदालत ने 20 मई को इसी मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी साझेदार कंपनियों की ओर से सुनवाई फिलहाल स्थगित करने की मांग को ठुकरा दिया था। कंपनियों ने केंद्र के साथ मध्यस्थता या सुलह के जरिए विवाद सुलझाने की इच्छा जताई थी।

उच्चतम न्यायालय रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) लिमिटेड की उन अपीलों पर सुनवाई कर रही है, जो दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 फरवरी 2025 के अपने आदेश में एकल पीठ के उस फैसले को निरस्त कर दिया था, जिसमें मध्यस्थता न्यायाधिकरण के उस निर्णय को बरकरार रखा गया था जो रिलायंस और उसके साझेदारों के पक्ष में था।

इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने केजी बेसिन के उन गैस भंडारों से गैस निकाली, जिनका दोहन करने का उन्हें अधिकार नहीं था।

भाषा प्रेम

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