नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कल्याणी परिवार की करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की पैतृक संपत्ति से जुड़े लंबे विवाद को सुलझाने के लिए सोमवार को अपने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल. एन. राव को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने भारत फोर्ज के चेयरमैन बाबा कल्याणी और उनकी बहन सुगंधा हिरेमथ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाने का आग्रह किया।
सीजेआई ने कहा, ‘‘आपने पहले मध्यस्थता से इनकार किया हो सकता है, लेकिन जब उच्चतम न्यायालय इसका अनुरोध कर रहा है तो क्या आप इसे नहीं मानेंगे? मध्यस्थता तभी सफल हो सकती है जब दोनों पक्षों के दिग्गज इसमें सहयोग करें।’’
न्यायमूर्ति बागची ने भी रचनात्मक रुख अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया में टकराव वाला रवैया नहीं होना चाहिए।
पीठ ने न्यायमूर्ति राव से इस मामले में मध्यस्थ के रूप में कार्य करने का अनुरोध किया।
सीजेआई ने कहा, ‘‘हम न्यायमूर्ति एल. एन. राव से अनुरोध करेंगे कि वह इसके लिए समय निकालें और दोनों पक्षों को सुनें।’’
न्यायालय ने दोनों पक्षों की सहमति दर्ज करते हुए कहा कि दोनों ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आश्वासन दिया है कि वे उसी दिन न्यायमूर्ति राव से संपर्क करेंगे, ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो सके।
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है।
इसके साथ ही न्यायालय ने उच्च न्यायालय में लंबित एक आवेदन पर जारी कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगाने का निर्देश दिया है।
प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘कभी-कभी अहंकार संपत्ति से भी बड़ा हो जाता है… मुझे विश्वास है कि मध्यस्थता सफल होगी।’’
कल्याणी परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी, कपिल सिब्बल और आर्यमा सुंदरम पेश हुए, जबकि सुगंधा हिरेमथ का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने रखा।
यह विवाद कल्याणी परिवार की पैतृक संपत्तियों पर दावों से जुड़ा है, जिनका मूल्य एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यह मामला कई न्यायिक मंचों पर कार्यवाहियों का विषय रहा है।
भाषा यासिर अजय
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