उच्चतम न्यायालय ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के खिलाफ 23 साल पुराना मामला रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के खिलाफ 23 साल पुराना मामला रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के खिलाफ 23 साल पुराना मामला रद्द किया
Modified Date: July 21, 2026 / 07:36 pm IST
Published Date: July 21, 2026 7:36 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को बड़ी राहत देते हुए 23 साल पुराने आपराधिक मामले और समन आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि शिकायत के समर्थन में कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य नहीं था।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने अपने अंतर्निहित अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मामला 23 वर्षों से लंबित है और तीन दशक पुराने लेन-देन से जुड़ा होने के बावजूद सुनवाई समन जारी होने के चरण से आगे नहीं बढ़ सकी।

शीर्ष अदालत ने बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि इस मामले को अब समाप्त करना ही उचित है।

पीठ ने कहा कि शिकायत विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (फेरा), 1973 के तहत कथित ‘स्पष्टीकरण नोटिस’ पर आधारित थी, लेकिन शिकायतकर्ता आज तक इसका कोई ठोस रिकॉर्ड या सटीक तिथि पेश नहीं कर सका।

पीठ ने कहा कि ऐसे हालात में मामले को जारी रखना बैंक और उसके अधिकारियों को अनिश्चितकाल तक अटकी हुई स्थिति में रखना होगा।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 397 के तहत वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने से धारा 482 के तहत याचिका की सुनवाई पर रोक नहीं लगती। दोनों प्रावधान अलग-अलग दायरे में काम करते हैं।

इसके साथ ही पीठ ने कहा कि फेरा कानून की धारा 61(2) के तहत ‘स्पष्टीकरण नोटिस’ देना अनिवार्य है। इसके बिना न तो वैध शिकायत दर्ज की जा सकती है और न ही मजिस्ट्रेट संज्ञान ले सकता है।

शीर्ष अदालत ने इस मामले में जांच एजेंसियों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रिकॉर्ड से लंबे समय तक बिना किसी ठोस कार्रवाई के लापरवाही साफ दिखाई देती है।

भाषा प्रेम अजय

अजय


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