स्विगी ने प्रबंधन अधिकारों में बदलाव के प्रस्ताव का किया बचाव
स्विगी ने प्रबंधन अधिकारों में बदलाव के प्रस्ताव का किया बचाव
नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) ऑनलाइन खाद्य आपूर्तिकर्ता स्विगी ने प्रबंधन से जुड़े प्रस्तावित बदलावों का बुधवार को बचाव करते हुए कहा कि ये कदम कंपनी में नियंत्रण के केंद्रीकरण के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शी एवं जवाबदेह ढांचे के तहत रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हैं।
कंपनी का यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब हाल ही में शेयरधारकों ने कंपनी के ‘कामकाज संबंधी उपनियमों’ (एओए) में संशोधन के प्रस्ताव को जरूरी 75 प्रतिशत के बजाय 72.36 प्रतिशत समर्थन ही दिया, जिससे यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
स्विगी ने नियामकीय सूचना में कहा कि प्रस्तावित बदलाव ऐसे कंपनी ढांचे में ‘घरेलू प्रबंधन की निरंतर निगरानी’ सुनिश्चित करने के लिए थे, जहां कोई स्पष्ट प्रवर्तक समूह नहीं है।
कंपनी ने यह भी कहा कि ये कदम भविष्य में ‘भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी’ (आईओसीसी) का दर्जा हासिल करने की तैयारी का हिस्सा थे।
कंपनी ने सह-संस्थापकों श्रीहर्ष मजेटी और फणी किशन अड्डेपल्ली को बोर्ड में नामांकन के अधिकार देने के प्रस्ताव का बचाव करते हुए कहा कि ये अधिकार सीमित, सशर्त और शेयरधारकों की निगरानी के अधीन होते।
नियामकीय सूचना के मुताबिक, मजेटी को केवल कंपनी के भीतर से एक वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारी को बोर्ड में नामित करने का अधिकार प्रस्तावित था, जबकि अड्डेपल्ली का अधिकार उनके रोजगार, ईएसओपी और शेयरधारिता से जुड़े आर्थिक हित बने रहने तक ही सीमित रहता।
कंपनी ने स्वामित्व सीमा को लेकर उठी आपत्तियों को भी खारिज करते हुए कहा कि भारतीय कॉरपोरेट और प्रतिभूति कानून बोर्ड में नामांकन के अधिकारों के लिए न्यूनतम शेयरधारिता की कोई शर्त निर्धारित नहीं करते हैं।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) नियमों के तहत किसी कंपनी को उसी समय भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली माना जाता है, जब उसका स्वामित्व एवं नियंत्रण भारतीय नागरिकों या पात्र भारतीय संस्थाओं के पास हो।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

Facebook


