तमिलनाडु पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज, श्वेत पत्र में पूर्व सरकार पर आरोप

तमिलनाडु पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज, श्वेत पत्र में पूर्व सरकार पर आरोप

तमिलनाडु पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज, श्वेत पत्र में पूर्व सरकार पर आरोप
Modified Date: June 16, 2026 / 10:16 pm IST
Published Date: June 16, 2026 10:16 pm IST

चेन्नई, 16 जून (भाषा) तमिलनाडु के वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने मंगलवार को राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी किया और पूर्ववर्ती द्रमुक सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राज्य का कर्ज बढ़कर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

विल्सन ने राज्य सचिवालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एक अप्रैल, 2021 को तमिलनाडु पर 5.13 लाख करोड़ रुपये देनदारी थी लेकिन यह 31 मार्च, 2026 तक बढ़कर करीब 10 लाख करोड़ रुपये हो गई जो सालाना 14.3 प्रतिशत की चक्रवृद्धि बढ़ोतरी है। यह अधिकांश वर्षों में मौजूदा कीमतों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि दर से अधिक रही।

पिछले महीने सत्ता संभालने वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों के कर्ज को शामिल करने पर राज्य का ‘वास्तविक’ कर्ज बोझ 13.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।

श्वेत पत्र के मुताबिक, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार के दौरान राज्य का बकाया कर्ज लगभग दोगुना हो गया, ब्याज भुगतान निवेश को सीमित कर रहा है, राजस्व घाटा संरचनात्मक बन गया है और राज्य का कर संग्रह प्रयास कमजोर पड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में ऋण एवं जीएसडीपी का अनुपात 28.3 प्रतिशत पर बना रहा और प्रति व्यक्ति देनदारी भी बढ़कर 1,28,934 रुपये हो गई, जो समकक्ष राज्यों की तुलना में अधिक है।

मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय की अगुवाई वाली सरकार ने कहा कि राजस्व घाटा अब संरचनात्मक स्वरूप ले चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 के प्रारंभिक आंकड़ों में राजस्व घाटा 78,324 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह कुल संख्या के मामले में कोविड-प्रभावित वर्ष 2020-21 के स्तर को भी पार कर गया है।

श्वेत पत्र के मुताबिक, ब्याज भुगतान, वेतन एवं पेंशन जैसे प्रतिबद्ध व्यय कुल राजस्व प्राप्तियों का 64.4 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं, जिससे विकास मद पर व्यय के लिए उपलब्ध संसाधन कम हो गए हैं।

विल्सन ने कहा कि राज्य के अपने कर राजस्व (एसओटीआर) और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के प्रमुख मानकों के संदर्भ में अनुपात 5.45 प्रतिशत रहा, जो काफी कम है।

उन्होंने कहा कि नई सरकार राजस्व बढ़ाने एवं प्रशासनिक दक्षता सुधारने के उपाय करेगी तथा राजस्व संग्रह में हो रही गड़बड़ियों को भी दूर किया जाएगा।

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि यह श्वेत पत्र 2021-22 से 2025-26 की अवधि का तथ्य आधारित विश्लेषण है और इसका उद्देश्य राज्य की वित्तीय स्थिति की पारदर्शी तस्वीर पेश करना है।

पिछले महीने मुख्यमंत्री बनने के साथ ही विजय ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र लाने की घोषणा की थी।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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